Thursday, December 1, 2022
Advertisement

प्रवासी मजदूरों पर वेबीनार आयोजित

केएल शाही रोहनिया, वाराणसी। स्थानीय क्षेत्र रोहनिया थाना के गंगापुर कोविड-19 के दौरान प्रवासी मजदूरों की सामाजिक- आर्थिक समस्याएं' विषय पर समाजशास्त्र विभाग, महाराज बलवंत सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय गंगापुर-वाराणसी के तत्वाधान में एक दिवसीय वेबीनार का आयोजन दोपहर 12:00 बजे से अपरान्ह 3:00 बजे तक हुआ। जिसका प्रारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य के द्वारा सभी प्रवक्ताओं एवं प्रतिभागियों के स्वागत से हुआ। प्राचार्य ने कोविड-19 महामारी के उद्भव, प्रसार, रोकथाम तथा प्रवासी मजदूरों पर इसके प्रभाव पर अपने विचार प्रस्तुत किए। तत्पश्चात डॉ. राजीव कुमार (सहायक-प्राध्यापक अर्थशास्त्र, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी) ने बताया कि अपने प्रारंभिक चरण में जहां महामारी बड़े महानगरीय केंद्रों तक सीमित थी वह अब प्रवासी मजदूरों के साथ छोटे नगरों व ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से अपने पैर पसार रही है। नगरों में सभी रोजगार धंधे, प्रतिष्ठान, औद्योगिक ईकाइयां, शॉपिंग मॉल आदि लाकडाउन के कारण बंद हो जाने से प्रवासी मजदूरों के समक्ष आवास, किराया, भोजन, रोजगार तथा स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का जन्म हुआ। जिससे प्रवासी मजदूर अपने गृह राज्यों, जनपदों तथा ग्रामीण क्षेत्रों की ओर तीव्र गति से पलायन कर रहे हैं। वर्तमान में सरकार ने लाकडाउन में ढील देते हुए औद्योगिक इकाइयों को पुनः प्रारंभ करने की आज्ञा प्रदान की है लेकिन प्रवासी मजदूरों के इन शहरों से लौट जाने के कारण अब उद्योगों में कार्य करने हेतु पर्याप्त श्रमिक नहीं हैं। ऐसी अवस्था में इन औद्योगिक इकाइयों को उत्पादन की कमी, उपलब्ध श्रमिकों को अधिक मजदूरी भुगतान तथा मूल्यवर्धन के चरणों से होकर गुजरना पड़ेगा। साथ ही जो मजदूर अपने ग्रामों में लौट कर आए हैं वह पुनः ग्रामीण स्तरीकरण के चक्कर में फंस सकते हैं। प्रो रेखा (प्राध्यापक- समाजशास्त्र विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ-वाराणसी) ने प्रवासी मजदूरों की समस्याओं के समाधान में ग्राम पंचायतों की भूमिका को महत्वपूर्ण माना तथा पंचायत स्तर पर प्रवासी मजदूरों के लिए बेरोजगारी भत्ता, मनरेगा में कार्य करने हेतु जॉब कार्ड, आयुष्मान कार्ड तथा उनके स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के निदान हेतु प्राइवेट अस्पतालों में भी इलाज की व्यवस्था करने की बात कही। इग्नू के क्षेत्रीय निदेशक श्री उपेंद्र नाथ त्रिपाठी ने कहा की कोरोना महामारी देश में नवीन सुधारों को भी जन्म देगी। अब जो भी प्रवासी मजदूर औद्योगिक क्षेत्रों में कार्य करने जाएंगे वह अपनी मजदूरी को लेकर मोलभाव करने में सक्षम होंगे तथा उन्हें ईपीएफ सुविधाएं भी उन्हें प्राप्त होंगी। जिन्हें प्रदान करने में औद्योगिक क्षेत्र पहले आनाकानी करते थे। अब मजदूरों का प्रवास केवल बहुत आवश्यकता पड़ने पर ही होगा क्योंकि कोई शहरों की चकाचौंध से प्रेरित होकर ग्रामीण क्षेत्र को छोड़कर शहरों की ओर पलायन नहीं करेगा। डॉ ए. पी. सिंह (विभागाध्यक्ष- वाणिज्य विभाग, हरिशचंद्र पीजी कॉलेज-वाराणसी) ने कहा कि सरकार को इस महामारी से उपजे लॉक डाउन के कारण दो स्तरों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। पहला यह कि महामारी के कारण सरकार के राजस्व में भारी कमी आई है अतः सरकार के समक्ष राजस्व जुटाना एक बड़ी चुनौती है जिससे विकास कार्यों को गति प्रदान की जा सके। वहीं दूसरी ओर प्रवासी मजदूरों के रोजगार, आवास, भोजन, यातायात एवं स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं को मुहैया कराना सरकार की बड़ी प्राथमिकता होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल के विचार को भी महत्वपूर्ण बताया जिससे प्रवासी मजदूरों को रोजगार प्रदान करने में सहायता मिलेगी। प्रो रमेश एच. मकवाना विभागाध्यक्ष- समाजशास्त्र विभाग, एस.पी.यू- गुजरात) ने प्रवासी मज़दूरों के पलायन के पीछे धन, भोजन, स्वास्थ्य निरीक्षण, बिजली-पानी, गैस आदि की अनुपलब्धता को जिम्मेदार ठहराया। यदि प्रवासी मजदूरों को यह सभी चीजें उनके कार्यस्थल पर उपलब्ध कराई गई होती तो शायद प्रवासी मजदूरों के इतने बड़े पलायन को कम किया जा सकता था। आगे उन्होंने यह चिंता भी व्यक्त की कि यदि यह प्रवासी मजदूर वापस लौट कर पुनः औद्योगिक इकाइयों में कार्य करने नहीं जाएंगे तो बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रीज और इंडस्ट्रियलिस्ट का क्या होगा? जिस पर विचार किया जाना आवश्यक है। प्रो. मानवेंद्र सिंह (विभागाध्यक्ष- समाजशास्त्र विभाग, डी.डी.यू.- गोरखपुर) ने प्रवासी मजदूरों के पलायन को एक अवसर के रूप में देखा क्योंकि प्रवासी मजदूरों के ग्रामीण क्षेत्रों की ओर पलायन के कारण ग्रामों में श्रम की उपलब्धता बढ़ेगी जिस का सदुपयोग करके ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जा सकता है। अतः ग्रामीण संरचना में आमूल-चूल परिवर्तन करके वस्तुओं की मांग को बढ़ाया जा सकता है। जिससे रोजगार के नए अवसर निर्मित होंगे। साथ ही उन्होंने मजदूरों एवं सरकार के मध्य समन्वय को अत्यधिक महत्वपूर्ण माना। सरकार को जन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना होगा जिसके लिए मनरेगा व एन.आर. एल.एम. जैसी योजनाओं को तीव्र गति से संचालित करने की जरूरत होगी इन सभी प्रयासों से उत्पन्न परिवर्तन समाजशास्त्रीयों, अर्थशास्त्रियों तथा राजनीति शास्त्रियों के अध्ययन हेतु नए विषय क्षेत्र निर्मित करेंगे। प्रो बी.बी. मलिक (संकाय प्रमुख, समाजशास्त्र विभाग, एस. ए. एस. सी. यू., लखनऊ) ने श्रम के पलायन की समस्या को समाजशास्त्रीय सिद्धांतों से जोड़कर विश्लेषित किया। उन्होंने कहा कि केवल सरकार के लिए अकेले राजस्व के अभाव में प्रवासी मजदूरों की समस्याओं का निदान करना संभव नहीं है इसके लिए समाज के सभी तबके के लोगों को आगे आकर सहयोग करना चाहिए। जाति, वर्ग व धर्म आदि भी ग्रामीण क्षेत्रों में श्रम निर्धारण के प्रमुख तत्व हैं जिन्हें ध्यान में रखकर ही प्रवासी मजदूरों की समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो आर.एन. त्रिपाठी (समाजशास्त्र विभाग, बी.एच.यू, सदस्य- उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग उत्तर प्रदेश) ने बताया कि प्रवासी मजदूरों के समस्याओं के निदान हेतु '६स के विचारधारा' पर कार्य करना चाहिए जो स्वबोध, सूश्य, स्वावलंबन, स्वदेशी, सनातन विकास तथा स्वराज के विचारों पर आधारित है। उन्होंने स्वदेशी एवं महात्मा गांधी के न्यासिता के सिद्धांत को भी प्रवासी मजदूरों की समस्याओं के निराकरण हेतु महत्वपूर्ण माना तथा प्रवासी मजदूरों की समस्या को एक सामाजिक-सांस्कृतिक समस्या मानकर ग्रामीण क्षेत्र की संस्थाओं (आवास, संयुक्त परिवार, जाति, धर्म व नैतिकता आदि।) पर इसके प्रभावों का अध्ययन करने की बात कही। वेबीनार में कुल 13 राज्यों के विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के प्रतिभागियों ने प्रतिभा किया। वेबीनार का संचालन संयोजक डॉ. आलोक कुमार कश्यप (विभागाध्यक्ष- समाजशास्त्र विभाग, महाराज बलवंत सिंह पी.जी. कॉलेज, गंगापुर- वाराणसी) ने किया। कार्यक्रम के सह संयोजक डॉ महेंद्र कुमार ने सभी वक्ताओं एवं प्रतिभागियों को वेबीनार में प्रतिभाग करने हेतु धन्यवाद दिया। वेबीनार में कुल 12 राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली तथा महाराज के विभिन्न शैक्षिक संस्थाओं के प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। डॉ. महेंद्र कुमार तथा डॉ. उमेश प्रसाद राय सहायक प्राध्यापक समाजशास्त्र विभाग महाराज बलवंत सिंह पीजी कॉलेज गंगापुर वाराणसी वेबीनार के संयोजक रहे।

केएल शाही
रोहनिया, वाराणसी। स्थानीय क्षेत्र रोहनिया थाना के गंगापुर कोविड-19 के दौरान प्रवासी मजदूरों की सामाजिक- आर्थिक समस्याएं’ विषय पर समाजशास्त्र विभाग, महाराज बलवंत सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय गंगापुर-वाराणसी के तत्वाधान में एक दिवसीय वेबीनार का आयोजन दोपहर 12:00 बजे से अपरान्ह 3:00 बजे तक हुआ। जिसका प्रारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य के द्वारा सभी प्रवक्ताओं एवं प्रतिभागियों के स्वागत से हुआ। प्राचार्य ने कोविड-19 महामारी के उद्भव, प्रसार, रोकथाम तथा प्रवासी मजदूरों पर इसके प्रभाव पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

तत्पश्चात डॉ. राजीव कुमार (सहायक-प्राध्यापक अर्थशास्त्र, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी) ने बताया कि अपने प्रारंभिक चरण में जहां महामारी बड़े महानगरीय केंद्रों तक सीमित थी वह अब प्रवासी मजदूरों के साथ छोटे नगरों व ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से अपने पैर पसार रही है। नगरों में सभी रोजगार धंधे, प्रतिष्ठान, औद्योगिक ईकाइयां, शॉपिंग मॉल आदि लाकडाउन के कारण बंद हो जाने से प्रवासी मजदूरों के समक्ष आवास, किराया, भोजन, रोजगार तथा स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का जन्म हुआ। जिससे प्रवासी मजदूर अपने गृह राज्यों, जनपदों तथा ग्रामीण क्षेत्रों की ओर तीव्र गति से पलायन कर रहे हैं।

वर्तमान में सरकार ने लाकडाउन में ढील देते हुए औद्योगिक इकाइयों को पुनः प्रारंभ करने की आज्ञा प्रदान की है लेकिन प्रवासी मजदूरों के इन शहरों से लौट जाने के कारण अब उद्योगों में कार्य करने हेतु पर्याप्त श्रमिक नहीं हैं। ऐसी अवस्था में इन औद्योगिक इकाइयों को उत्पादन की कमी, उपलब्ध श्रमिकों को अधिक मजदूरी भुगतान तथा मूल्यवर्धन के चरणों से होकर गुजरना पड़ेगा। साथ ही जो मजदूर अपने ग्रामों में लौट कर आए हैं वह पुनः ग्रामीण स्तरीकरण के चक्कर में फंस सकते हैं। प्रो रेखा (प्राध्यापक- समाजशास्त्र विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ-वाराणसी) ने प्रवासी मजदूरों की समस्याओं के समाधान में ग्राम पंचायतों की भूमिका को महत्वपूर्ण माना तथा पंचायत स्तर पर प्रवासी मजदूरों के लिए बेरोजगारी भत्ता, मनरेगा में कार्य करने हेतु जॉब कार्ड, आयुष्मान कार्ड तथा उनके स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के निदान हेतु प्राइवेट अस्पतालों में भी इलाज की व्यवस्था करने की बात कही।

इग्नू के क्षेत्रीय निदेशक श्री उपेंद्र नाथ त्रिपाठी ने कहा की कोरोना महामारी देश में नवीन सुधारों को भी जन्म देगी। अब जो भी प्रवासी मजदूर औद्योगिक क्षेत्रों में कार्य करने जाएंगे वह अपनी मजदूरी को लेकर मोलभाव करने में सक्षम होंगे तथा उन्हें ईपीएफ सुविधाएं भी उन्हें प्राप्त होंगी। जिन्हें प्रदान करने में औद्योगिक क्षेत्र पहले आनाकानी करते थे। अब मजदूरों का प्रवास केवल बहुत आवश्यकता पड़ने पर ही होगा क्योंकि कोई शहरों की चकाचौंध से प्रेरित होकर ग्रामीण क्षेत्र को छोड़कर शहरों की ओर पलायन नहीं करेगा। डॉ ए. पी. सिंह (विभागाध्यक्ष- वाणिज्य विभाग, हरिशचंद्र पीजी कॉलेज-वाराणसी) ने कहा कि सरकार को इस महामारी से उपजे लॉक डाउन के कारण दो स्तरों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

पहला यह कि महामारी के कारण सरकार के राजस्व में भारी कमी आई है अतः सरकार के समक्ष राजस्व जुटाना एक बड़ी चुनौती है जिससे विकास कार्यों को गति प्रदान की जा सके। वहीं दूसरी ओर प्रवासी मजदूरों के रोजगार, आवास, भोजन, यातायात एवं स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं को मुहैया कराना सरकार की बड़ी प्राथमिकता होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल के विचार को भी महत्वपूर्ण बताया जिससे प्रवासी मजदूरों को रोजगार प्रदान करने में सहायता मिलेगी।

प्रो रमेश एच. मकवाना विभागाध्यक्ष- समाजशास्त्र विभाग, एस.पी.यू- गुजरात) ने प्रवासी मज़दूरों के पलायन के पीछे धन, भोजन, स्वास्थ्य निरीक्षण, बिजली-पानी, गैस आदि की अनुपलब्धता को जिम्मेदार ठहराया। यदि प्रवासी मजदूरों को यह सभी चीजें उनके कार्यस्थल पर उपलब्ध कराई गई होती तो शायद प्रवासी मजदूरों के इतने बड़े पलायन को कम किया जा सकता था। आगे उन्होंने यह चिंता भी व्यक्त की कि यदि यह प्रवासी मजदूर वापस लौट कर पुनः औद्योगिक इकाइयों में कार्य करने नहीं जाएंगे तो बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रीज और इंडस्ट्रियलिस्ट का क्या होगा? जिस पर विचार किया जाना आवश्यक है।

प्रो. मानवेंद्र सिंह (विभागाध्यक्ष- समाजशास्त्र विभाग, डी.डी.यू.- गोरखपुर) ने प्रवासी मजदूरों के पलायन को एक अवसर के रूप में देखा क्योंकि प्रवासी मजदूरों के ग्रामीण क्षेत्रों की ओर पलायन के कारण ग्रामों में श्रम की उपलब्धता बढ़ेगी जिस का सदुपयोग करके ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जा सकता है। अतः ग्रामीण संरचना में आमूल-चूल परिवर्तन करके वस्तुओं की मांग को बढ़ाया जा सकता है। जिससे रोजगार के नए अवसर निर्मित होंगे। साथ ही उन्होंने मजदूरों एवं सरकार के मध्य समन्वय को अत्यधिक महत्वपूर्ण माना। सरकार को जन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना होगा जिसके लिए मनरेगा व एन.आर. एल.एम. जैसी योजनाओं को तीव्र गति से संचालित करने की जरूरत होगी इन सभी प्रयासों से उत्पन्न परिवर्तन समाजशास्त्रीयों, अर्थशास्त्रियों तथा राजनीति शास्त्रियों के अध्ययन हेतु नए विषय क्षेत्र निर्मित करेंगे। प्रो बी.बी. मलिक (संकाय प्रमुख, समाजशास्त्र विभाग, एस. ए. एस. सी. यू., लखनऊ) ने श्रम के पलायन की समस्या को समाजशास्त्रीय सिद्धांतों से जोड़कर विश्लेषित किया। उन्होंने कहा कि केवल सरकार के लिए अकेले राजस्व के अभाव में प्रवासी मजदूरों की समस्याओं का निदान करना संभव नहीं है इसके लिए समाज के सभी तबके के लोगों को आगे आकर सहयोग करना चाहिए।

जाति, वर्ग व धर्म आदि भी ग्रामीण क्षेत्रों में श्रम निर्धारण के प्रमुख तत्व हैं जिन्हें ध्यान में रखकर ही प्रवासी मजदूरों की समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो आर.एन. त्रिपाठी (समाजशास्त्र विभाग, बी.एच.यू, सदस्य- उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग उत्तर प्रदेश) ने बताया कि प्रवासी मजदूरों के समस्याओं के निदान हेतु ‘६स के विचारधारा’ पर कार्य करना चाहिए जो स्वबोध, सूश्य, स्वावलंबन, स्वदेशी, सनातन विकास तथा स्वराज के विचारों पर आधारित है। उन्होंने स्वदेशी एवं महात्मा गांधी के न्यासिता के सिद्धांत को भी प्रवासी मजदूरों की समस्याओं के निराकरण हेतु महत्वपूर्ण माना तथा प्रवासी मजदूरों की समस्या को एक सामाजिक-सांस्कृतिक समस्या मानकर ग्रामीण क्षेत्र की संस्थाओं (आवास, संयुक्त परिवार, जाति, धर्म व नैतिकता आदि।) पर इसके प्रभावों का अध्ययन करने की बात कही। वेबीनार में कुल 13 राज्यों के विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के प्रतिभागियों ने प्रतिभा किया।

वेबीनार का संचालन संयोजक डॉ. आलोक कुमार कश्यप (विभागाध्यक्ष- समाजशास्त्र विभाग, महाराज बलवंत सिंह पी.जी. कॉलेज, गंगापुर- वाराणसी) ने किया। कार्यक्रम के सह संयोजक डॉ महेंद्र कुमार ने सभी वक्ताओं एवं प्रतिभागियों को वेबीनार में प्रतिभाग करने हेतु धन्यवाद दिया। वेबीनार में कुल 12 राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली तथा महाराज के विभिन्न शैक्षिक संस्थाओं के प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। डॉ. महेंद्र कुमार तथा डॉ. उमेश प्रसाद राय सहायक प्राध्यापक समाजशास्त्र विभाग महाराज बलवंत सिंह पीजी कॉलेज गंगापुर वाराणसी वेबीनार के संयोजक रहे।

केएल शाही रोहनिया, वाराणसी। स्थानीय क्षेत्र रोहनिया थाना के गंगापुर कोविड-19 के दौरान प्रवासी मजदूरों की सामाजिक- आर्थिक समस्याएं' विषय पर समाजशास्त्र विभाग, महाराज बलवंत सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय गंगापुर-वाराणसी के तत्वाधान में एक दिवसीय वेबीनार का आयोजन दोपहर 12:00 बजे से अपरान्ह 3:00 बजे तक हुआ। जिसका प्रारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य के द्वारा सभी प्रवक्ताओं एवं प्रतिभागियों के स्वागत से हुआ। प्राचार्य ने कोविड-19 महामारी के उद्भव, प्रसार, रोकथाम तथा प्रवासी मजदूरों पर इसके प्रभाव पर अपने विचार प्रस्तुत किए। तत्पश्चात डॉ. राजीव कुमार (सहायक-प्राध्यापक अर्थशास्त्र, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी) ने बताया कि अपने प्रारंभिक चरण में जहां महामारी बड़े महानगरीय केंद्रों तक सीमित थी वह अब प्रवासी मजदूरों के साथ छोटे नगरों व ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से अपने पैर पसार रही है। नगरों में सभी रोजगार धंधे, प्रतिष्ठान, औद्योगिक ईकाइयां, शॉपिंग मॉल आदि लाकडाउन के कारण बंद हो जाने से प्रवासी मजदूरों के समक्ष आवास, किराया, भोजन, रोजगार तथा स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का जन्म हुआ। जिससे प्रवासी मजदूर अपने गृह राज्यों, जनपदों तथा ग्रामीण क्षेत्रों की ओर तीव्र गति से पलायन कर रहे हैं। वर्तमान में सरकार ने लाकडाउन में ढील देते हुए औद्योगिक इकाइयों को पुनः प्रारंभ करने की आज्ञा प्रदान की है लेकिन प्रवासी मजदूरों के इन शहरों से लौट जाने के कारण अब उद्योगों में कार्य करने हेतु पर्याप्त श्रमिक नहीं हैं। ऐसी अवस्था में इन औद्योगिक इकाइयों को उत्पादन की कमी, उपलब्ध श्रमिकों को अधिक मजदूरी भुगतान तथा मूल्यवर्धन के चरणों से होकर गुजरना पड़ेगा। साथ ही जो मजदूर अपने ग्रामों में लौट कर आए हैं वह पुनः ग्रामीण स्तरीकरण के चक्कर में फंस सकते हैं। प्रो रेखा (प्राध्यापक- समाजशास्त्र विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ-वाराणसी) ने प्रवासी मजदूरों की समस्याओं के समाधान में ग्राम पंचायतों की भूमिका को महत्वपूर्ण माना तथा पंचायत स्तर पर प्रवासी मजदूरों के लिए बेरोजगारी भत्ता, मनरेगा में कार्य करने हेतु जॉब कार्ड, आयुष्मान कार्ड तथा उनके स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के निदान हेतु प्राइवेट अस्पतालों में भी इलाज की व्यवस्था करने की बात कही। इग्नू के क्षेत्रीय निदेशक श्री उपेंद्र नाथ त्रिपाठी ने कहा की कोरोना महामारी देश में नवीन सुधारों को भी जन्म देगी। अब जो भी प्रवासी मजदूर औद्योगिक क्षेत्रों में कार्य करने जाएंगे वह अपनी मजदूरी को लेकर मोलभाव करने में सक्षम होंगे तथा उन्हें ईपीएफ सुविधाएं भी उन्हें प्राप्त होंगी। जिन्हें प्रदान करने में औद्योगिक क्षेत्र पहले आनाकानी करते थे। अब मजदूरों का प्रवास केवल बहुत आवश्यकता पड़ने पर ही होगा क्योंकि कोई शहरों की चकाचौंध से प्रेरित होकर ग्रामीण क्षेत्र को छोड़कर शहरों की ओर पलायन नहीं करेगा। डॉ ए. पी. सिंह (विभागाध्यक्ष- वाणिज्य विभाग, हरिशचंद्र पीजी कॉलेज-वाराणसी) ने कहा कि सरकार को इस महामारी से उपजे लॉक डाउन के कारण दो स्तरों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। पहला यह कि महामारी के कारण सरकार के राजस्व में भारी कमी आई है अतः सरकार के समक्ष राजस्व जुटाना एक बड़ी चुनौती है जिससे विकास कार्यों को गति प्रदान की जा सके। वहीं दूसरी ओर प्रवासी मजदूरों के रोजगार, आवास, भोजन, यातायात एवं स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं को मुहैया कराना सरकार की बड़ी प्राथमिकता होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल के विचार को भी महत्वपूर्ण बताया जिससे प्रवासी मजदूरों को रोजगार प्रदान करने में सहायता मिलेगी। प्रो रमेश एच. मकवाना विभागाध्यक्ष- समाजशास्त्र विभाग, एस.पी.यू- गुजरात) ने प्रवासी मज़दूरों के पलायन के पीछे धन, भोजन, स्वास्थ्य निरीक्षण, बिजली-पानी, गैस आदि की अनुपलब्धता को जिम्मेदार ठहराया। यदि प्रवासी मजदूरों को यह सभी चीजें उनके कार्यस्थल पर उपलब्ध कराई गई होती तो शायद प्रवासी मजदूरों के इतने बड़े पलायन को कम किया जा सकता था। आगे उन्होंने यह चिंता भी व्यक्त की कि यदि यह प्रवासी मजदूर वापस लौट कर पुनः औद्योगिक इकाइयों में कार्य करने नहीं जाएंगे तो बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रीज और इंडस्ट्रियलिस्ट का क्या होगा? जिस पर विचार किया जाना आवश्यक है। प्रो. मानवेंद्र सिंह (विभागाध्यक्ष- समाजशास्त्र विभाग, डी.डी.यू.- गोरखपुर) ने प्रवासी मजदूरों के पलायन को एक अवसर के रूप में देखा क्योंकि प्रवासी मजदूरों के ग्रामीण क्षेत्रों की ओर पलायन के कारण ग्रामों में श्रम की उपलब्धता बढ़ेगी जिस का सदुपयोग करके ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जा सकता है। अतः ग्रामीण संरचना में आमूल-चूल परिवर्तन करके वस्तुओं की मांग को बढ़ाया जा सकता है। जिससे रोजगार के नए अवसर निर्मित होंगे। साथ ही उन्होंने मजदूरों एवं सरकार के मध्य समन्वय को अत्यधिक महत्वपूर्ण माना। सरकार को जन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना होगा जिसके लिए मनरेगा व एन.आर. एल.एम. जैसी योजनाओं को तीव्र गति से संचालित करने की जरूरत होगी इन सभी प्रयासों से उत्पन्न परिवर्तन समाजशास्त्रीयों, अर्थशास्त्रियों तथा राजनीति शास्त्रियों के अध्ययन हेतु नए विषय क्षेत्र निर्मित करेंगे। प्रो बी.बी. मलिक (संकाय प्रमुख, समाजशास्त्र विभाग, एस. ए. एस. सी. यू., लखनऊ) ने श्रम के पलायन की समस्या को समाजशास्त्रीय सिद्धांतों से जोड़कर विश्लेषित किया। उन्होंने कहा कि केवल सरकार के लिए अकेले राजस्व के अभाव में प्रवासी मजदूरों की समस्याओं का निदान करना संभव नहीं है इसके लिए समाज के सभी तबके के लोगों को आगे आकर सहयोग करना चाहिए। जाति, वर्ग व धर्म आदि भी ग्रामीण क्षेत्रों में श्रम निर्धारण के प्रमुख तत्व हैं जिन्हें ध्यान में रखकर ही प्रवासी मजदूरों की समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो आर.एन. त्रिपाठी (समाजशास्त्र विभाग, बी.एच.यू, सदस्य- उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग उत्तर प्रदेश) ने बताया कि प्रवासी मजदूरों के समस्याओं के निदान हेतु '६स के विचारधारा' पर कार्य करना चाहिए जो स्वबोध, सूश्य, स्वावलंबन, स्वदेशी, सनातन विकास तथा स्वराज के विचारों पर आधारित है। उन्होंने स्वदेशी एवं महात्मा गांधी के न्यासिता के सिद्धांत को भी प्रवासी मजदूरों की समस्याओं के निराकरण हेतु महत्वपूर्ण माना तथा प्रवासी मजदूरों की समस्या को एक सामाजिक-सांस्कृतिक समस्या मानकर ग्रामीण क्षेत्र की संस्थाओं (आवास, संयुक्त परिवार, जाति, धर्म व नैतिकता आदि।) पर इसके प्रभावों का अध्ययन करने की बात कही। वेबीनार में कुल 13 राज्यों के विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के प्रतिभागियों ने प्रतिभा किया। वेबीनार का संचालन संयोजक डॉ. आलोक कुमार कश्यप (विभागाध्यक्ष- समाजशास्त्र विभाग, महाराज बलवंत सिंह पी.जी. कॉलेज, गंगापुर- वाराणसी) ने किया। कार्यक्रम के सह संयोजक डॉ महेंद्र कुमार ने सभी वक्ताओं एवं प्रतिभागियों को वेबीनार में प्रतिभाग करने हेतु धन्यवाद दिया। वेबीनार में कुल 12 राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली तथा महाराज के विभिन्न शैक्षिक संस्थाओं के प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। डॉ. महेंद्र कुमार तथा डॉ. उमेश प्रसाद राय सहायक प्राध्यापक समाजशास्त्र विभाग महाराज बलवंत सिंह पीजी कॉलेज गंगापुर वाराणसी वेबीनार के संयोजक रहे।
Deepak Jaiswal 7007529997, 9918557796
आप लोगों भरपूर सहयोग और प्यार की वजह से तेजस टूडे डॉट कॉम आज Google News और Dailyhunt जैसे बड़े प्लेटर्फाम पर जगह बना लिया है। आज इसकी पाठक संख्या लगातार बढ़ रही है और इसके लगभग 2 करोड़ विजिटर हो गये है। आपका प्यार ऐसे ही मिलता रहा तो यह पूर्वांचल के साथ साथ भारत में अपना एक अलग पहचान बना लेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Read More

Recent