ठेले से यूबीआई पहुंची बीमार वृद्धा, बैंककर्मी ने किया अमानवीय व्यवहार

बरईपार सहायता  समूह की पहल पर लाचार महिला को मिले रूपये विपिन मौर्य एडवोकेट मछलीशहर, जौनपुर (टीटीएन) 17 अप्रैल। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिये देशबन्दी होने के बाद हर जगह सन्नाटा पसर गया। इसका असर सन्नाटे सड़कों के साथ उन परिवारों के भी जीवन में दस्तक दे चुका है जो गरीब, असहाय, कामगार, मजदूर आदि हैं। जहां गरीब परिवार केन्द्र सरकार द्वारा प्राप्त जनधन खातों में सहायता राशि से परिवार के भरण-पोषण में रास्ता तलाश रह हैं, वहीं कुछ अत्यन्त गरीब परिवार अपने बुजुर्गों की वृद्धा पेंशन से चन्द दिनों के परिवार का गुजर बसर कर रहे हैं। ऐसे में यदि कोई बीमार बुजुर्ग जो अपने पौरूष के बल पर न चल सकती है और न ही उठ-बैठ सकती है तो उसके कलेजे पर क्या बीतेगी? स्थिति तब और भयावह हो जाती है जब वह तपती दुपहरी में चादर ओढ़कर ठेले पर एक वृद्धा बैंक के बाहर लेटी हो और अन्त में यह कहकर उसके परिवारीजन को घर भेज दिया जाय कि बैंक बन्द हो गया है। जाओ कल आना तो उसे कितनी असहाय पीड़ा होगी? ऐसा ही एक मामला सिकरारा क्षेत्र के बरईपार बाजार में स्थित यूनियन बैंक में शुक्रवार को देखने को मिला। बताया गया कि लगभग 80 वर्षीया रसकल्ली पत्नी दुखीराम निवासी सकरदेल्हा ठेले पर लदी बीमार अवस्था में चादर ओढ़े जैसे-तैसे अपने पेंशन निकासी के लिये वह बीते गुरूवार को यूनियन बैंक की उक्त शाखा पर पहुंची। समय से पहुंचने के बावजूद तपती दुपहरी में परिवार के सभी लोग अपनी बारी का इंतजार करने लगे कि कब नम्बर आये और पैसे निकले। करीब दो घण्टे इंतजार करने के बाद उन्हें बैंक परिसर के अंदर जाने का मौका मिला। बावजूद इसके मैनेजर द्वारा मानवीय व्यवहार की जगह अभद्र व्यवहार किया गया। उन्हें यह कहकर भगा दिया गया कि बैंक बन्द हो गया है। यहां से भागो। मरता क्या न करता। गरीब परिवार आंखों में आंसू लिये भगवान के सहारे सब कुछ छोड़कर परिसर के बाहर आ गया। इस सुधि के साथ कि कल पुनः प्रयास करेंगे। अगले दिन यानी आज शुक्रवार को बैंक खुलते ही परिवारीजन वापस दस्तक दिये लेकिन सैकड़ों की तादाद में लोग निकासी के लिये पहले से मौजूद थे। हालात पूर्ववत थे। आस-पास छांव न होने के कारण इंतजार में फिर से बुजुर्ग महिला धूप में चादर ओढ़े लेटी रही। इस घटना के बारे में जैसे ही स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं जो बरईपार सहायता समूह नाम से गरीब-असहाय लोगों को खाद्य सामग्री वितरण करके मदद कर रहे, को पता चला वे तत्काल शाखा प्रबंधक से उनका पक्ष जानने की कोशिश किये। इसके बाद प्रबन्धक ने बैंक मित्र को आदेशित किया कि उक्त वृद्धा को 1400 रूपये की निकासी रकम तत्काल मुहैया करायी जाय जिसका पालन भी हुआ लेकिन वृद्धा के साथ किये गये अमानवीय व्यवहार को लेकर लोग बैंक परिवार को कोस रहे हैं।

बरईपार सहायता समूह की पहल पर लाचार महिला को मिले रूपये

विपिन मौर्य एडवोकेट
मछलीशहर, जौनपुर (टीटीएन) 17 अप्रैल। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिये देशबन्दी होने के बाद हर जगह सन्नाटा पसर गया। इसका असर सन्नाटे सड़कों के साथ उन परिवारों के भी जीवन में दस्तक दे चुका है जो गरीब, असहाय, कामगार, मजदूर आदि हैं। जहां गरीब परिवार केन्द्र सरकार द्वारा प्राप्त जनधन खातों में सहायता राशि से परिवार के भरण-पोषण में रास्ता तलाश रह हैं, वहीं कुछ अत्यन्त गरीब परिवार अपने बुजुर्गों की वृद्धा पेंशन से चन्द दिनों के परिवार का गुजर बसर कर रहे हैं।

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ऐसे में यदि कोई बीमार बुजुर्ग जो अपने पौरूष के बल पर न चल सकती है और न ही उठ-बैठ सकती है तो उसके कलेजे पर क्या बीतेगी? स्थिति तब और भयावह हो जाती है जब वह तपती दुपहरी में चादर ओढ़कर ठेले पर एक वृद्धा बैंक के बाहर लेटी हो और अन्त में यह कहकर उसके परिवारीजन को घर भेज दिया जाय कि बैंक बन्द हो गया है। जाओ कल आना तो उसे कितनी असहाय पीड़ा होगी?

ऐसा ही एक मामला सिकरारा क्षेत्र के बरईपार बाजार में स्थित यूनियन बैंक में शुक्रवार को देखने को मिला। बताया गया कि लगभग 80 वर्षीया रसकल्ली पत्नी दुखीराम निवासी सकरदेल्हा ठेले पर लदी बीमार अवस्था में चादर ओढ़े जैसे-तैसे अपने पेंशन निकासी के लिये वह बीते गुरूवार को यूनियन बैंक की उक्त शाखा पर पहुंची।

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समय से पहुंचने के बावजूद तपती दुपहरी में परिवार के सभी लोग अपनी बारी का इंतजार करने लगे कि कब नम्बर आये और पैसे निकले। करीब दो घण्टे इंतजार करने के बाद उन्हें बैंक परिसर के अंदर जाने का मौका मिला। बावजूद इसके मैनेजर द्वारा मानवीय व्यवहार की जगह अभद्र व्यवहार किया गया। उन्हें यह कहकर भगा दिया गया कि बैंक बन्द हो गया है। यहां से भागो। मरता क्या न करता।

गरीब परिवार आंखों में आंसू लिये भगवान के सहारे सब कुछ छोड़कर परिसर के बाहर आ गया। इस सुधि के साथ कि कल पुनः प्रयास करेंगे। अगले दिन यानी आज शुक्रवार को बैंक खुलते ही परिवारीजन वापस दस्तक दिये लेकिन सैकड़ों की तादाद में लोग निकासी के लिये पहले से मौजूद थे। हालात पूर्ववत थे। आस-पास छांव न होने के कारण इंतजार में फिर से बुजुर्ग महिला धूप में चादर ओढ़े लेटी रही।

इस घटना के बारे में जैसे ही स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं जो बरईपार सहायता समूह नाम से गरीब-असहाय लोगों को खाद्य सामग्री वितरण करके मदद कर रहे, को पता चला वे तत्काल शाखा प्रबंधक से उनका पक्ष जानने की कोशिश किये। इसके बाद प्रबन्धक ने बैंक मित्र को आदेशित किया कि उक्त वृद्धा को 1400 रूपये की निकासी रकम तत्काल मुहैया करायी जाय जिसका पालन भी हुआ लेकिन वृद्धा के साथ किये गये अमानवीय व्यवहार को लेकर लोग बैंक परिवार को कोस रहे हैं।

आप लोगों भरपूर सहयोग और प्यार की वजह से तेजस टूडे डॉट कॉम आज Google News और Dailyhunt जैसे बड़े प्लेटर्फाम पर जगह बना लिया है। आज इसकी पाठक संख्या लगातार बढ़ रही है और इसके लगभग डेढ़ करोड़ विजिटर हो गये है। आपका प्यार ऐसे ही मिलता रहा तो यह पूर्वांचल के साथ साथ भारत में अपना एक अलग पहचान बना लेगा।
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