Thursday, May 21, 2026
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बाइकों की टक्कर में दो लोग घायल | #TEJASTODAY

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जफराबाद, जौनपुर। जलालपुर थाना क्षेत्र के कबूलपुर गांव में नहर के पास दो बाइकों की आमने-सामने टक्कर में दो लोग घायल हो गये। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। केराकत नई बाजार निवासी नरेश सरोज अपने भांजे मनीष कुमार सरोज के साथ सिरकोनी से अपने रिश्तेदार के यहां से होकर अपने घर नई बाजार जा रहे थे। कबूलपुर की तरफ से बाइक से एक युवक सिरकोनी की तरफ जा रहा था। दोनों बाइकों की आमने-सामने टक्कर हो गई जिससे गिरकर मनीष कुमार और रामनरेश घायल हो गये। टक्कर मारने वाला दूसरा युवक बाइक लेकर फरार हो गया। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया।

जफराबाद, जौनपुर। जलालपुर थाना क्षेत्र के कबूलपुर गांव में नहर के पास दो बाइकों की आमने-सामने टक्कर में दो लोग घायल हो गये। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। केराकत नई बाजार निवासी नरेश सरोज अपने भांजे मनीष कुमार सरोज के साथ सिरकोनी से अपने रिश्तेदार के यहां से होकर अपने घर नई बाजार जा रहे थे। कबूलपुर की तरफ से बाइक से एक युवक सिरकोनी की तरफ जा रहा था।

जौनपुर। भाजपा कार्यालय पर सामाजिक दूरी का ख्याल रखते हुये जिलाध्यक्ष श्री पुष्पराज सिंह के अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें आपातकाल पर चर्चा हुई। जिलाध्यक्ष ने कहा कि 25 जून का दिन एक विवादस्पद फैसले के लिए जाना जाता है यही वह दिन था जब देश में आपातकाल लगाने की घोषणा हुई तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जनता को बेवजह मुश्किलों के समुंदर में धकेल दिया। 25 जून, 1975 को आपातकाल की घोषणा की गई और 26 जून 1975 से 21-मार्च 1977 तक यानी 21 महीने की अवधि तक आपातकाल जारी रहा। आपातकाल के फैसले को लेकर इंदिरा गांधी द्वारा कई दलीलें दी गईं। देश को गंभीर खतरा बताया गया, लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही थी उन्होंने कहा कि हमारे जिले जौनपुर से भी कई नेता जेल गए जिसमे मुख्य रूप से पूर्व विधायक सुरेन्द्र सिंह अल्प आयु में ही जेल गए कैलाश विश्वकर्मा जी, हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव तमाम नेता जेल गये थे। जिलाध्यक्ष ने कहा कि आपातकाल की नींव 12 जून 1975 को ही रख दी गई थी जब इंदिरा गांधी के खिलाफ संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी राजनारायण ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की राजनारायण ने अपनी याचिका में इंदिरा गांधी पर 6 आरोप लगाये थे 12 जून 1975 को राजनारायण की इस याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया इंदिरा गांधी को चुनाव में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का दोषी पाया गया और इंदिरा गांधी के निर्वाचन को रद्द कर दिया और 6 साल तक उनके चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ता इसलिए इस लटकती तलवार से बचने के लिए प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास पर आपात बैठक बुलाई गई। इस दौरान कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष डीके बरुआ ने इंदिरा गांधी को सुझाव दिया कि अंतिम फैसला आने तक वो कांग्रेस अध्यक्ष बन जाएं और प्रधानमंत्री की कुर्सी वह खुद संभाल लेंगे लेकिन बरुआ का यह सुझाव इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी को पसंद नहीं आया संजय की सलाह पर इंदिरा गांधी ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 23 जून को सुप्रीम कोर्ट में अपील की सुप्रीम कोर्ट ने अगले दिन 24 जून 1975 को याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि वो इस फैसले पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें प्रधानमंत्री बने रहने की अनुमति दे दी, मगर साथ ही कहा कि वो अंतिम फैसला आने तक सांसद के रूप में मतदान नहीं कर सकतीं विपक्ष के नेता सुप्रीम कोर्ट का पूरा फैसला आने तक नैतिक तौर पर इंदिरा गांधी के इस्तीफे पर अड़ गए। एक तरफ इंदिरा गांधी कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ रहीं थीं, दूसरी तरफ विपक्ष उन्हें घेरने में जुटा हुआ था। गुजरात और बिहार में छात्रों के आंदोलन के बाद विपक्ष कांग्रेस के खिलाफ एकजुट हो गया। लोकनायक कहे जाने वाले जयप्रकाश नारायण (जेपी) की अगुआई में विपक्ष लगातार कांग्रेस सरकार पर हमला कर रहा था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अगले दिन 25 जून 1975 को दिल्ली के रामलीला मैदान में जेपी ने एक रैली का आयोजन किया जिसमे अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, आचार्य जेबी कृपलानी, मोरारजी देसाई और चंद्रशेखर जैसे तमाम दिग्गज नेता एक साथ एक मंच पर मौजूद थे। विपक्ष के बढ़ते दबाव के बीच इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 की आधी रात को तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से इमरजेंसी के घोषणा पत्र पर दस्तखत करा लिए जिसके बाद सभी विपक्षी नेता गिरफ्तार कर लिए गए 26 जून 1975 को सुबह 6 बजे कैबिनेट की एक बैठक बुलाई गई इस बैठक के बाद इंदिरा गांधी ने ऑल इंडिया रेडियो के ऑफिस पहुंचकर देश को संबोधित किया उन्होंने कहा कि आपातकाल के पीछे आंतरिक अशांति को वजह बताई लेकिन इसके खिलाफ गहरी साजिश रची गई इसके बाद प्रेस की आजादी छीन ली गई, कई वरिष्ठ पत्रकारों को जेल भेज दिया गया अखबार तो बाद में फिर छपने लगे, लेकिन उनमें क्या छापा जा रहा है। ये पहले सरकार को बताना पड़ता था। इमरजेंसी का विरोध करने वालों को इंदिरा गांधी ने जेल भेज दिया था 21 महीने में 11 लाख लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया. 21 मार्च 1977 को इमरजेंसी खत्म करने की घोषणा की गई। इंदिरा गांधी और कांग्रेस आपातकाल को संविधान के अनुसार लिए गया फैसला बताते रहे, लेकिन वास्तव में उन्होंने 1975 में संविधान द्वारा दिए गए इस अधिकार का दुरुपयोग किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से शामिल जिला उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंघानियां, अमित श्रीवास्तव, जिला महामंत्री शुशील मिश्रा, पीयूष गुप्ता, जिला मंत्री राजू दादा, अभय राय डीसीएफ चेयरमैन धन्यजय सिंह, भूपेंद्र पांडे, आमोद सिंह, विनीत शुक्ला, राजवीर दुर्गवंशी, रोहन सिंह, इन्द्रसेन सिंह प्रमोद, अनिल गुप्ता, प्रमोद प्रजापति, भाजयुमो जिला महामंत्री विकास ओझा, शुभम मौर्या आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

दोनों बाइकों की आमने-सामने टक्कर हो गई जिससे गिरकर मनीष कुमार और रामनरेश घायल हो गये। टक्कर मारने वाला दूसरा युवक बाइक लेकर फरार हो गया। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया।

जौनपुर। जायसवाल क्लब जौनपुर द्वारा नवनियुक्त जिला उपाध्यक्ष समाजवादी पार्टी श्रवण जायसवाल का स्वागत कार्यक्रम का आयोजन संगठन के जिला अध्यक्ष के आवास पर आयोजित किया गया। जिसमें कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश जायसवाल ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने हमारे व्यापारी नेता श्रवण जायसवाल पर भरोसा किया। इस लिंक के द्वारा घर बैठे कमा सकते है दिन के 1 हजार रूपये, मैन खुद आजमाया है। https://www.faryclubs.com/account/login?invite_key=85011243 अधिक जानकारी के लिए इस वाट्सअप्प ग्रुप को जॉइन करें। https://chat.whatsapp.com/HSLcilJYLUXF57phbWviKH यह हमारे जायसवाल समाज के लिए गौरव की बात है। क्योकि इतिहास गवाह है कि हम सहस्त्रबाहु अर्जुन के बंसज जिनका गौरवशाली इतिहास रहा है कि कलवार समाज में गजब की अगुआई करने की क्षमता है आज उस प्रतिभा को पहचानने का कार्य समाजवादी पार्टी के शीर्ष ​नेतृत्व ने किया है। हम समाज के लोग एक स्वर में श्री अखिलेश यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष समाजवादी पार्टी को दिल की गहराइयों से धन्यवाद ज्ञापित करते है और यह भी कहा कि जायसवाल समाज सपा के शीर्ष नेतृत्व का आजीवन ऋणी रहेगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रवण जायसवाल ने कार्यक्रम में उपस्थित समस्त स्वजातीय बंधुओं का आभार प्रकट करते हुये कहा कि मैं समाज के समस्त उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करूंगा। उक्त अवसर पर पीयुष गुप्ता, रमेश जायसवाल, पवन जायसवाल, हेमन्त जायसवाल, संतोष जायसवाल, विनय कुमार जायसवाल, राजकुमार जायसवाल सहित तमाम स्वजातीय बंधु मौजूद रहे। संचालन सुरेन्द्र जायसवाल ने किया।

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