पीड़ा से कराहती रही युवती को इमरजेंसी सेवा में तैनात डॉक्टरों ने देखने से दिया मना

सै. हसनैन कमर दीपू जौनपुर। जिला अस्पताल में शनिवार की दोपहर करीब ढाई बजे उस समय अफरातफरी मच गयी जब बख्शा थाना क्षेत्र की एक 18 वर्षीय युवती कुमकुम सिंह पुत्री सुरेश सिंह को उसके परिजन इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। युवती लगातार छींक रही थी और हाफती हुई जमीन पर बैठ गयी। इस दौरान परिवारवालों ने डॉक्टरों से उसे देखने की गुजारिश की लेकिन इमरजेंसी सेवा में तैनात डॉक्टरों ने उसे देखने से मना कर दिया। करीब एक घंटे तक वह युवती इमरजेंसी वार्ड के बाहर फर्श पर बैठकर लगातार छींकती, कराहती रही और उसकी सुधि लेने वाला कोई नजर नहीं आ रहा था। जब उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो आनन-फानन में पहुंचे चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल शर्मा ने उसे तत्काल कोरोना के आईसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया और उसका सैम्पल लेकर जांच के लिए भेज दिया। इस बारे में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल शर्मा का कहना है कि जिस तरह से युवती लगातार छींक रही थी उससे डॉक्टर लोग डर गये थे जिसके चलते उसे भर्ती करने में थोड़ा बिलंब हुआ। फिलहाल उसका इलाज किया जा रहा है और डॉक्टरों की इसमें कोई लापरवाही प्रथम दृष्टया नजर नहीं आयी। सवाल यह उठता है कि प्रदेश सरकार के आदेश पर जिले में कोरोना महामारी को देखते हुए किसी भी मरीज में उसके लक्षण दिखाई देते है तो तत्काल उसका इलाज प्रारंभ होना चाहिए लेकिन यहां घंटों तक युवती अस्पताल के फर्श पर बैठी रही और उसे देखना वाला कोई नजर नहीं आया। इससे यह बात तो साबित हो गयी कि अभी भी कुछ लोग ऐसे है जो अपने कर्तव्यों के प्रति कहीं न कहीं लापरवाही बरत रहे हैं। वहीं डॉ. अनिल शर्मा ने बताया कि बहुत से चिकित्सक ऐसे है कि इस गंभीर बीमारी के डर के कारण अपनी ड्यूटी करने से कतरा रहे हैं जबकि हम सभी का यह कर्तव्य है कि इस महामारी को मिलकर हराना है। फिलहाल इस घटना ने जिले की चिकित्सा व्यवस्था पर एक बार फिर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

सै. हसनैन कमर दीपू
जौनपुर। जिला अस्पताल में शनिवार की दोपहर करीब ढाई बजे उस समय अफरातफरी मच गयी जब बख्शा थाना क्षेत्र की एक 18 वर्षीय युवती कुमकुम सिंह पुत्री सुरेश सिंह को उसके परिजन इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। युवती लगातार छींक रही थी और हाफती हुई जमीन पर बैठ गयी। इस दौरान परिवारवालों ने डॉक्टरों से उसे देखने की गुजारिश की लेकिन इमरजेंसी सेवा में तैनात डॉक्टरों ने उसे देखने से मना कर दिया। करीब एक घंटे तक वह युवती इमरजेंसी वार्ड के बाहर फर्श पर बैठकर लगातार छींकती, कराहती रही और उसकी सुधि लेने वाला कोई नजर नहीं आ रहा था।

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जब उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो आनन-फानन में पहुंचे चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल शर्मा ने उसे तत्काल कोरोना के आईसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया और उसका सैम्पल लेकर जांच के लिए भेज दिया। इस बारे में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल शर्मा का कहना है कि जिस तरह से युवती लगातार छींक रही थी उससे डॉक्टर लोग डर गये थे जिसके चलते उसे भर्ती करने में थोड़ा बिलंब हुआ। फिलहाल उसका इलाज किया जा रहा है और डॉक्टरों की इसमें कोई लापरवाही प्रथम दृष्टया नजर नहीं आयी।

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सवाल यह उठता है कि प्रदेश सरकार के आदेश पर जिले में कोरोना महामारी को देखते हुए किसी भी मरीज में उसके लक्षण दिखाई देते है तो तत्काल उसका इलाज प्रारंभ होना चाहिए लेकिन यहां घंटों तक युवती अस्पताल के फर्श पर बैठी रही और उसे देखना वाला कोई नजर नहीं आया। इससे यह बात तो साबित हो गयी कि अभी भी कुछ लोग ऐसे है जो अपने कर्तव्यों के प्रति कहीं न कहीं लापरवाही बरत रहे हैं। वहीं डॉ. अनिल शर्मा ने बताया कि बहुत से चिकित्सक ऐसे है कि इस गंभीर बीमारी के डर के कारण अपनी ड्यूटी करने से कतरा रहे हैं जबकि हम सभी का यह कर्तव्य है कि इस महामारी को मिलकर हराना है। फिलहाल इस घटना ने जिले की चिकित्सा व्यवस्था पर एक बार फिर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

सै. हसनैन कमर दीपू जौनपुर। जिला अस्पताल में शनिवार की दोपहर करीब ढाई बजे उस समय अफरातफरी मच गयी जब बख्शा थाना क्षेत्र की एक 18 वर्षीय युवती कुमकुम सिंह पुत्री सुरेश सिंह को उसके परिजन इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। युवती लगातार छींक रही थी और हाफती हुई जमीन पर बैठ गयी। इस दौरान परिवारवालों ने डॉक्टरों से उसे देखने की गुजारिश की लेकिन इमरजेंसी सेवा में तैनात डॉक्टरों ने उसे देखने से मना कर दिया। करीब एक घंटे तक वह युवती इमरजेंसी वार्ड के बाहर फर्श पर बैठकर लगातार छींकती, कराहती रही और उसकी सुधि लेने वाला कोई नजर नहीं आ रहा था। जब उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो आनन-फानन में पहुंचे चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल शर्मा ने उसे तत्काल कोरोना के आईसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया और उसका सैम्पल लेकर जांच के लिए भेज दिया। इस बारे में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल शर्मा का कहना है कि जिस तरह से युवती लगातार छींक रही थी उससे डॉक्टर लोग डर गये थे जिसके चलते उसे भर्ती करने में थोड़ा बिलंब हुआ। फिलहाल उसका इलाज किया जा रहा है और डॉक्टरों की इसमें कोई लापरवाही प्रथम दृष्टया नजर नहीं आयी। सवाल यह उठता है कि प्रदेश सरकार के आदेश पर जिले में कोरोना महामारी को देखते हुए किसी भी मरीज में उसके लक्षण दिखाई देते है तो तत्काल उसका इलाज प्रारंभ होना चाहिए लेकिन यहां घंटों तक युवती अस्पताल के फर्श पर बैठी रही और उसे देखना वाला कोई नजर नहीं आया। इससे यह बात तो साबित हो गयी कि अभी भी कुछ लोग ऐसे है जो अपने कर्तव्यों के प्रति कहीं न कहीं लापरवाही बरत रहे हैं। वहीं डॉ. अनिल शर्मा ने बताया कि बहुत से चिकित्सक ऐसे है कि इस गंभीर बीमारी के डर के कारण अपनी ड्यूटी करने से कतरा रहे हैं जबकि हम सभी का यह कर्तव्य है कि इस महामारी को मिलकर हराना है। फिलहाल इस घटना ने जिले की चिकित्सा व्यवस्था पर एक बार फिर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
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