HomeTrendingबुंदेलखण्ड इंसाफ सेना की भूख हड़ताल को सिटी मजिस्ट्रेट ने कराया समाप्त

बुंदेलखण्ड इंसाफ सेना की भूख हड़ताल को सिटी मजिस्ट्रेट ने कराया समाप्त

  • बुंदेलखण्ड इंसाफ सेना की भूख हड़ताल को सिटी मजिस्ट्रेट ने कराया समाप्त

  • जल, जंगल, पहाड़, अवैध कटान एवं केन नदी बचाने को लेकर चल रही थी भूख हड़ताल

तेजस टूडे ब्यूरो
रूपा गोयल
बांदा। बांदा में जल, जंगल, पहाड़, अवैध कटान और केन नदी बचाने को लेकर बुंदेलखंड इंसाफ सेना की 3 दिवसीय भूख हड़ताल को सिटी मजिस्ट्रेट संदीप केला द्वारा जूस पिलाकर समाप्त किया गया जहां बुंदेलखंड इंसाफ सेवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एएस नोमानी सहित संगठन के पदाधिकारीगण ने ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि बांदा जनपद में बढ़ते अवैध खनन, बेकाबू वायु प्रदूषण, भीषण गर्मी, लगातार हो रही वनों की कटाई तथा जल स्रोतों पर बढ़ते संकट के विरोध में बुंदेलखंड इंसाफ सेना द्वारा भूख हड़ताल किया जा रहा था जिसे सिटी मजिस्ट्रेट श्री संदीप केला जी द्वारा मांगों पर आश्वासन देते हुए मांगों को पूरी करने का आश्वासन दिया गया।
श्री नोमानी ने यह भी कहा है कि खनन कार्यों में नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। निर्धारित मानकों से अधिक खनन के कारण पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है जिससे कृषि, जल स्रोतों, वन्य जीवन और आम जनजीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बुंदेलखंड की प्राकृतिक धरोहर को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है। समाजसेवी शाहान अली ने आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए कहा कि जल, जंगल, पहाड़, तालाब और नदियों की रक्षा केवल पर्यावरण का नहीं बल्कि मानव अस्तित्व का प्रश्न है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर जागरूक रहने और जनहित के मुद्दों पर एकजुट होने की अपील किया।
आंदोलन को समाजसेवी प्रमोद आज़ाद तथा पूर्व जिलाध्यक्ष कांग्रेस प्रद्युम्न दुबे का भी समर्थन प्राप्त हुआ। सभी ने पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। भूख हड़ताल का नेतृत्व कर रहे ए.एस. नोमानी ने मांग किया कि बांदा जनपद में पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए आगामी 10 वर्षों तक खनन गतिविधियों पर रोक लगाई जाए। लगातार हो रहे खनन, जंगलों की कटाई और जल स्रोतों के दोहन से क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन गंभीर संकट में है। यदि अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को जल संकट, प्रदूषण और प्राकृतिक विनाश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
आंदोलनकारियों ने कहा कि यह संघर्ष केवल वर्तमान समस्याओं के समाधान के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य, स्वच्छ पर्यावरण, हरियाली, जल संरक्षण और केन नदी के अस्तित्व की रक्षा के लिए भी है। साथ ही बुंदेलखंड क्षेत्र के तालाबों को संरक्षित करने, उन पर हो रहे अवैध कब्जों को हटाने तथा उनके पुनर्जीवन की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। 3 जून को आंदोलन के तीसरे दिन बुंदेलखंड इंसाफ सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष नोमानी ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नगर मजिस्ट्रेट को मांग पत्र/ज्ञापन सौंपा। नगर मजिस्ट्रेट ने आंदोलनकारियों की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी कर उचित कार्रवाई की जाएगी। इसके उपरांत नगर मजिस्ट्रेट संदीप केला ने लगातार तीन दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे ए. एस. नोमानी को जूस पिलाकर भूख हड़ताल समाप्त कराई।
इस अवसर पर मोहन लाल वर्मा, भोले बाबा, महेंद्र कुमार, छोटे लाल वर्मा, बृजेश द्विवेदी, जुल्फी खान सहित उपस्थित सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों ने पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा, अवैध खनन पर रोक तथा जल, जंगल, पहाड़, तालाब और केन नदी के संरक्षण के संकल्प को दोहराया। बुंदेलखंड इंसाफ सेना ने स्पष्ट किया कि भूख हड़ताल का चरण समाप्त हुआ है लेकिन पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए जनजागरण एवं लोकतांत्रिक संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।

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