
जनपद के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं की कलाई उस समय खुली जब तेजस टूडे हिंदी दैनिक अखबार कि पड़ताल में सलोन ब्लाक क्षेत्र स्थित मटका ग्राम पंचायत के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जा पहुंचीं। रविवार का दिन था। कैमरे के लोकेशन से खींचे गए फोटो में दोपहर के 1:40 बजे थे अवसर मुख्यमंत्री आरोग्य मेला का।
जिसकी याद में पीएचसी के डाक्टरों ने एक बैनर टांगा था जिसमें मुख्यमंत्री आरोग्य मेला तो लिखा था किंतु मौके कि नजाकत उससे उल्टी थी। मौके पर कोई चिकित्सक नहीं एक सफाई कर्मचारी दिखा जो कुछ भी बोलने को तैयार नहीं था। अंदर जाने पर कुर्सियां खाली थी। सारे डाक्टर फार्मासिस्ट नदारद थे उनके कमरे के दरवाजे खुले थे। हालांकि स्थानीय ग्रामीणों कि मानें तो यह हाल कोई एक दिन का नहीं है अक्सर देर से आना और जल्दी चले जाना पीएचसी मटका के डाक्टरों की फितरत है। बाहर निकलने पर तीन चार मरीज दिखे। बाहर खड़े मरीजों ने बताया कि बड़ी कुर्सी पर बैठे मटका पीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक कहे इलाज कराने 1 बजे जाने के समय क्यों आये हो। 12 बजे तक चिकित्सालय आया करो, 12 के बाद आधे घंटे का लंच होता है। फिर कुछ देर आराम कर के हमें भी घर जाना होता है, मेरे भी घर में बाल-बच्चे हैं। आखिर मरीजों के इन शब्दों में कितनी सच्चाई है। यह तो जांच का विषय है किंतु कैमरे में कैद फोटो इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि पीएचसी के डाक्टर जब आरोग्य मेला के ऐन मौके पर गायब दिखे तो भला प्रतिदिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कितना बैठे होंगे, यह एक सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न बना हुआ है। ये कारनामे सलोन के किसी एक ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का नहीं किसी एक चिकित्साधिकारी का नहीं बल्कि प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का है जो तेजस टूडे के महज एक दिन के पड़ताल में ही उभर कर समक्ष आ गई।





