यूपी में भाजपा हार पर मंथन, मंशा कुछ और है, सफल नहीं होंगे: ध्रुवचन्द जायसवाल

अजय जायसवाल
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में भाजपा की करारी हार पर मंथन हो रही है। इसके पीछे मंशा कुछ और है। सफलता नहीं मिलेगी। गुजरात लाबी उत्तर प्रदेश के लोगों को अपने मुठ्ठी में रखना चाहती है लेकिन अपने मंशा में सफल नहीं हो सकती है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में अधिकांशतः लोग स्वाभिमान एवं खुद्दारी से समझौता नहीं करते हैं। कुछ लोग कायरता की जीवनशैली अपना लिया है। उनका जब स्वाभिमान जागेगा तो खाली हाथ लौटेंगे। स्मरण रहे कि भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष ने उत्तर प्रदेश के नेताओं से पूछा कि आखिर सरकार के बेहतर काम के बावजूद हार का सामना क्यों करना पड़ा है? मुख्य वजह क्या है? सभी ने अपने विचारों से अवगत कराया है। ओबीसी एवं दलित वोट को अपने पक्ष में लाने की अपील किया है। आक्रामक ढंग से सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी का पक्ष रखने का सुझाव दिया है। खासकर पिछड़े दलित नेताओं को बुलाकर समीक्षा बैठक में पूछताछ किया था किन्तु भाजपा के वैश्य नेताओं को समीक्षा बैठक में नहीं बुलाकर कोई पुछताछ नहीं की। इसका मुख्य कारण वैश्यों को राजनैतिक पहचान बनाने से रोकने की साज़िश है, इसलिए समाचार पत्रों में कोई ज़िक्र तक नहीं किया जबकि सोशल मिडिया में चर्चा हुई कि इस बार वैश्यों ने भाजपा के विरुद्ध मतदान किया है किन्तु भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने भाजपा के वैश्य नेताओं से करारी हार पर चर्चा इसलिए नहीं किया कि पूरे देश में यह संदेश चला जाता कि उत्तर प्रदेश में वैश्यों ने भाजपा के पक्ष में मतदान नहीं किया। कहीं उत्तर प्रदेश के वैश्यों की बगावत अन्य प्रान्तों में पहुंच गई तो भाजपा कांग्रेस की स्थिति में पहुंचने में देर नहीं लगेगी।
उक्त बातें अखिल भारतीय जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष ध्रुवचन्द जायसवाल ने प्रेस को जारी बयान में कही। साथ ही आगे कहा कि यूपी में भाजपा की करारी हार की मुख्य कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं की ओर भाजपा के रणनीतिकारों का ध्यान आकर्षित हेतु कुछ मुख्य वजहें इस प्रकार है। गुजरात लाबी द्वारा अहंकार में अयोग्य लोगों को टिकट दिया गया। गुजरात लाबी अपने निजी लाभ हेतु आवश्यकता से अधिक प्रशासनिक हस्तक्षेप करना एवं कुछ नेताओं को बहुत तव्वजों देना। मोदी सरकार की आरक्षण नीतियां भी महंगाई भ्रष्टाचार जिम्मेदार है। चुनाव के दौरान चुनाव आयोग द्वारा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों का ट्रान्सफर भी एक वजह है। गुजरात लाबी उत्तर प्रदेश में दखल देना बंद नहीं किया तो आगे और दयनीय हालात में पहुंचने से कोई रोक नहीं सकता है। देश में आम चर्चा है कि मोदी जी के बाद योगी जी सर्वमान्य नेता हैं। इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि महासभा ने 3 चरणों के चुनाव के रुझानों को देखते हुए भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व से मांग किया था कि अभी भी समय है। कुछ प्रत्याशियों का टिकट बदल दिया जाय, अन्यथा महागठबंधन यूपी में 40 से अधिक सीटों पर चुनाव जीतने जा रहा है जो समाचार पत्रों में प्रकाशित भी हुआ था किन्तु भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व ने महासभा की सुझाव पर ध्यान नहीं दिया। ध्यान दिया होता तो आज यह दिन देखने को नहीं मिलती। योगी जी गोरखपुर मंडल सहित अगल—बगल की सीटों पर विशेष ध्यान आकर्षित नहीं किया होता तो 20-25 सीटों पर भाजपा सिमटी गई होती। कुछ लोग योगी जी का विरोध कर रहे हैं। कुछ जनाधारविहिन नेता हैं। कुछ जिनके सहारे चुनाव जीतते हैं, उन्हीं का विरोध करते हैं। यह उनका चरित्र है। कुछ अपने एवं अपने परिवार के लिए राजनीति करते हैं।
आधुनिक तकनीक से करायें प्रचार, बिजनेस बढ़ाने पर करें विचार
हमारे न्यूज पोर्टल पर करायें सस्ते दर पर प्रचार प्रसार।












