Tag: Inspector Jitendra is not able to curb the crimes of Salon police station area

  • सलोन थाना क्षेत्र के अपराधों पर अंकुश नहीं लगा पा रहे इंस्पेक्टर जितेन्द्र, कारनामों पर डालते हैं पर्दा

    सलोन थाना क्षेत्र के अपराधों पर अंकुश नहीं लगा पा रहे इंस्पेक्टर जितेन्द्र, कारनामों पर डालते हैं पर्दा

    सलोन थाना क्षेत्र के अपराधों पर अंकुश नहीं लगा पा रहे इंस्पेक्टर जितेन्द्र, कारनामों पर डालते हैं पर्दा

    डीह में भी लचर कार्यशैली से थे चर्चित, सलोन थाना की कमान संभालते ही धड़ल्ले से शुरू हुआ अवैध खनन

    आईजीआरएस रैंकिंग में फिसड्डी हो रहा सलोन थाना, गम्भीर मामलों में भी डालते हैं पर्दा

    अनुभव शुक्ला
    रायबरेली। सिफारिश की दम पर जिले के थानों पर वर्षों से काबिज सलोन थाना में तैनात बड़बोले इंस्पेक्टर जीतेंद्र प्रताप सिंह के कारनामों को भांपकर पिछले पूर्व एसपी आलोक प्रियदर्शी ने इंस्पेक्टर जीतेंद्र प्रताप सिंह को महराजगंज थानाध्यक्ष की कुर्सी से उतार फेंका था और अपराध शाखा की कमान सौंप दिया था। किंतु सिफारिश का खेल चला और इंस्पेक्टर जीतेंद्र प्रताप सिंह को डीह थाना की कमान मिल गई जहां तैनाती के दौरान रसूख के दबाव में कई महीनों तैनाती के दौरान कई पीड़ितों व असहायों की जमीन पर अवैध कब्जा कराने व गम्भीर मामलों का रसूख के दबाव में साक्ष्य होने के बावजूद निपटारा करने में सफल रहे। समय का चक्र घूमा और डीह थाना क्षेत्र के दो रसूखदारों के बीच वर्चस्व को लेकर हुए संघर्ष में ये साहब कार्यवाही तो दूर मुकदमा लिखने में घंटों सिफारिशों का इंतजार करते रहे। जिस पक्ष से जैसे जैसे सिफारिशें आती गई साहब मुकदमा लिखते गये किन्तु खुलेआम गोली चलने की वारदात को देखने के बावजूद रसूखदारों की कठपुतली बने रहे। डीह के पूर्व थानाध्यक्ष जीतेंद्र प्रताप सिंह न्यायोचित कार्यवाही से कतराते रहे। एक बार फिर से सिफारिश का गेम सफल हुआ और साहब सलोन थानाध्यक्ष की कुर्सी पर आ धमके। जहां आते ही क्षेत्र की कानून व्यवस्था एकाएक बेलगाम हो गई। हम आपको कुछ ही मामले बताते हैं जिससे की लचर कार्यशैली पर धब्बा लगा रहा है। पहला मामला उमरी गांव से निकल कर सामने आया जहां पीड़ित ने सूची चौकी इंचार्ज पर पीटने का आरोप लगाया। दूसरा मामला सूची चौकी क्षेत्र के ही सामने आया जहां असलहे के दम पर बकरियां चोरी हो गई। तीसरा मामला दुबहन गांव का सामने आया जहां ठीक होली के दिन दो पक्षों जमकर खूनी संघर्ष हुआ। चौथा मामला ममुनी गांव से जुड़ा हुआ है जहां पीड़ित को दबंगों ने पीट दिया और पांचवां मामला करहिया चौकी क्षेत्र से निकलकर सामने आया जहां चौकी इंचार्ज ने वाहन चालक से पांच हजार रुपए रिश्वत ली। पीड़ित ने आरोप लगाया किंतु नतीजा शून्य निकला और तो और करहिया चौकी क्षेत्र के ही माधवपुर पाठक गांव की ही पीड़िता धनपत देवी पत्नी सुंदर लाल पाठक को बेखौफ दबंगों ने जमकर पीटा। लहूलुहान बुजुर्ग पीड़िता का हांथ टूट गया। थाना का चक्कर काटते-काटते थक गई किंतु उसे न्याय मिलना मुनासिब नहीं हुआ। थक-हार कर पीड़िता ने एसपी से न्याय की गुहार लगाई है। इन मामलों में साफ तौर से देखा जा सकता है कि सलोन थानाध्यक्ष कि कमान संभालनें वाले इंस्पेक्टर जीतेंद्र प्रताप सिंह की लचर कार्यशैली से फरियादियों को न्याय मिलना मील का पत्थर साबित हो चुका है। आखिर इन साहब का कब-तक सिफारिशों का खेल जिले में चलकर फरियादियों व असहायों के न्याय को कुचला जायेगा। यह तो आने वाला समय ही बताएगा। किंतु इन साहब कि लचर कार्यशैली से क्षेत्र के दबंगों के एक तरफ जहां हौसले बुलंद हैं तो वहीं दूसरी तरफ क्षेत्रीय फरियादियों के अन्दर डर का माहौल है।

    तो क्या इंस्पेक्टर जितेन्द्र के नेतृत्व में आईजीआरएस रैंकिंग में सलोन थाना का नहीं आयेगा नाम…?
    आईजीआरएस (जनसुनवाई पोर्टल) की रैंकिंग में प्रदेश में अव्वल रहने वाला सलोन थाना में बड़बोले इंस्पेक्टर जीतेंद्र प्रताप सिंह की लचर कार्यशैली से आख्या देर से जनसुनवाई पोर्टल पर अपलोड हो रही हैं जिससे जाहिर सी बात है कि वह दिन दूर नहीं जब रैंकिंग में इस बार सलोन थाना की गणना फिसड्डी थानों में गिनी जायेगी। तो और पटलों पर करेक्टर सर्टिफिकेट से लेकर क्षेत्रीय हल्का में तैनात एसआई व आरक्षी जमकर मौज काट रहे हैं।

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