अवैध उगाही के कारनामों से आये दिन सुर्खियों में रहते हैं दारोगा अजीत प्रताप
खाकी को लगातार शर्मशार करने वाले दारोगा पर कार्यवाही से क्यों कतरा रहे जिम्मेदार?
भदोखर थाने पर तैनाती से ही चर्चा में बने हुये हैं भ्रष्टाचारी सब इन्स्पेक्टर
संदीप पाण्डेय
रायबरेली। रक्षक जब भक्षक बन करके आमजन को प्रताड़ित करने की सारी हदे पार कर देता है तो कोई न कोई आवाज उठाने को मजबूर हो जाता है। जी हां, भदोखर थाने में अपनी तैनाती से ही सुर्खियों में बना रहने वाला दारोगा अजीत प्रताप सिंह पर यहां के बड़बोले थानेदार के संरक्षण में अवैध उगाही के आरोप लगते रहे है। इसके बावजूद अभी तक कोई भी कार्यवाही नहीं किये जाने से विभागीय अधिकारियों पर ही सवालिया निशान लगने लगा है। उल्लेखनीय है कि बीते माह में भांव क्षेत्र की एक महिला ने दारोगा अजीत प्रताप सिंह और सिपाही बड़े बाबू पर घर में घुसकर मारपीट करने और 50 हजार रुपए रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। मामले में उच्चाधिकारियों द्वारा मांगे गए जबाब में अधीनस्थ अधिकारियों ने दारोगा और सिपाही साफ बचाते हुए बरी कराने में कामयाब हो गये। मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि पूरे फजा गांव की रहने वाली सुनीता मौर्या पत्नी स्व. शिवसेवक ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर बताया कि पूरे फजा के ही निवासी ओम प्रकाश उर्फ़ पिंटू पुत्र रामदास ने उसके पति से धोखे से बैनामा करा लिया था। बैनामे के एवज में तय रकम का शेष 4 लाख दिलाये जाने को दारोगा अजीत प्रताप पीड़िता से 25 प्रतिशत बतौर रिश्वत यानी कि एक लाख रुपए की मांग कर रहे हैं। पीड़िता का आरोप है कि पुलिस की सांठ—गांठ से सरहंग और दबंग किस्म का ओम प्रकाश उसको धमकी भी देता रहता है। सबसे बडा प्रश्न चिन्ह विभागीय लोगों पर खड़ा हो रहा है कि आखिर इतने मामलों में आरोप लगने के बाद भी खाकी को लगातार शर्मशार करने वाले दारोगा पर कार्यवाही से जिम्मेदार क्यों कतरा रहे हैं? अब देखना है कि पुलिस अधीक्षक इस मामले के बाद आरोपी के खिलाफ कोई कार्यवाही करते भी हैं अथवा मामला बस्ता खमोशी में चला जाएगा।

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