सफाईकर्मियों की उदासीनता से गांवों में लगा गन्दगी का अम्बार, गम्भीर बीमारियों का बढ़ा खतरा
बीडीओ की गाड़ी एवं एडीओ पंचायत कार्यालय में कम्प्यूटर चला रहे सफाईकर्मियों पर प्रशासन मौन
तेजस टूडे ब्यूरो
संदीप पाण्डेय
रायबरेली। सरकार के महत्वाकांक्षी अभियान स्वच्छ भारत मिशन की सार्थकता को भरकस प्रयास किये जा रहे हैं। विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए भिन्न प्रकार के जागरुकता अभियान चलाये जा रहे हैं लेकिन मुख्य रूप से सफाई के लिए नियुक्त गांवों के सफाईकर्मी ही अलग अलग कामों को कर रहे हैं। जिस कारण से गांवों में फैली गन्दगी से ही गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। गंभीर बीमारियों और संचारी रोग के रोकथाम के लिए चलाये जा रहे विशेष अभियान में सफाईकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका होने के बावजूद सिर्फ फोटो खिंचाने के अलावा कोई रूचि नहीं ली गई।
उल्लेखनीय है कि मुख्यालय से सटे राही ब्लाक में सफाईकर्मी रंजीत मौर्य पिछले कई वर्षों से खंड विकास अधिकारी की गाड़ी चला रहा है। यहीं पर सफाईकर्मी मनीष चौरसिया एडीओ पंचायत कार्यालय में कम्प्यूटर ही नहीं चलाता, बल्कि सरकारी योजनाओं की धता उड़ाने में अहम किरदार की भूमिका भी अदा करता है। ऐसे ही रामविजय मौर्या, पवन मौर्या, अमर चौरसिया, अशोक यादव समेत कई सफाईकर्मी ऑफिस के बाबू और चालक बनकर सिस्टम का मजाक उड़ा रहे हैं।
सबसे अधिक हास्यास्पद बात यह है कि इन गांवों में तैनात सफाईकर्मी जब सारा दिन ब्लाक में जमे रहते हैं तो इन गांवों में सार्वजनिक स्थलों, नालियों आदि की साफ सफाई कौन कर रहा है। विभागीय लोगों की मानें तो सफाईकर्मियों का वेतन पेरोल ग्राम प्रधान और ग्राम विकास/पंचायत अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर से प्रमाणित होता है। सबसे बड़ा भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़ा किये जाने का अंदेशा यही से शुरू होता है कि जब ये ब्लाक में ही बने रहते हैं तो इनकी उपस्थिति किसके दबाव में प्रमाणित की जाती है और किस दवाब में इनका वेतन निर्गत किया जा रहा है। सफाईकर्मियों की हठधर्मिता हो या अधिकारियों की बेबसी से गांवों में गंदगी का अम्बार लगा हुआ है। कचरे से बजबजाती नालियों से गंभीर बीमारियों और संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है जिसको लेकर स्थानीय ग्रामीणों में गहरा रोष व्याप्त है।

ऐसी क्या मजबूरी कि अधिकारियों के लिये सफाईकर्मी जरूरी कुछ ऐसे भी सफाईकर्मी हैं जिनके बदले कोई दूसरा कर रहा काम रायबरेली। गौरतलब है कि पूर्व में खबर सुर्खियों में आने के बाद एक्शन में आए तत्कालीन जिला पंचायत राज अधिकारी ने सफाईकर्मी मनीष चौरसिया का स्थानांतरण कर दिया था। उसके बाद लोकसभा के चुनाव के दौरान इसने जुगाड़ तंत्र के सहारे अपने को निर्वाचन कार्यालय से सम्बद्ध करा लिया था। सूत्र बताते हैं कि चुनाव समाप्त होने के बाद इसका पुनः उसी गांव में स्थानांतरण हो जाना सवालों के घेरे में होने के साथ इसकी उपस्थिति लगातार ब्लाक में क़ायम है। सूत्र बताते हैं कि कार्यालय में होने वाली अधिकांश अनैतिक गतिविधियों में भी इसकी भूमिका संदिग्ध है जबकि चालक बने सफाईकर्मी रंजीत मौर्या के बारे में चर्चा है कि लंबे अरसे से ब्लाक में रहने के कारण उसको ब्लाक की सभी फर्जी गतिविधियों की जानकारी रहती है जिस कारण यह रौब जमाये रहता है। विकास कार्यों को आने वाले सरकारी धन के यहां होने वाले बंदरबाँट की जानकारी और हिस्सेदारी में भी इसकी महती भूमिका रहती है।
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