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  • कैंसर से जंग जीत गया वैभव, पिता की मौत के बाद भी नहीं टूटा हौंसला

    कैंसर से जंग जीत गया वैभव, पिता की मौत के बाद भी नहीं टूटा हौंसला

    कैंसर से जंग जीत गया वैभव, पिता की मौत के बाद भी नहीं टूटा हौंसला

    जौनपुर। हिम्मत, हौंसला और उम्मीद हो तो आप किसी भी विषम परिस्थिति से निपट सकते हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है जनपद का वैभव सिंह ने। बचपन में ब्रेन ट्यूमर और ब्रेन कैंसर से पीड़ित यह युवा लाइलाज बीमारी से जंग जीत गया। अब वह पूरी तरह से स्वस्थ है जो पढ़ाई लिखाई भी शुरू कर दिया है। इस वर्ष उसने इण्टर की परीक्षा पास करके बी-काम में दाखिला लेने जा रहा है। जिले के केराकत तहसील के मुरारा गांव निवासी वैभव के पिता विजय सिंह की मौत सन् 2012 में हो गयी थी। बचपन में ही वैभव के सिर से पिता साया छिन गया जिसके एक वर्ष बाद वह गम्भीर बीमारी से पीड़ित हो गया। मां वंदना सिंह एवं परिवार के अन्य सदस्य जिले के कई अस्पतालों में उपचार करवाये लेकिन उसकी हालत सुधरने के बजाय और खराब होती जा रही थी। थक—हारकर परिवार वाले उसे बीएचयू ले गये जहां डाक्टरों ने बताया कि वैभव को ब्रेन ट्यूमर है। जल्द ही उसका आपरेशन करवाना होगा, अन्यथा उसका बचना मुश्किल हो जायेगा।
    वैभव की मां वंदना ने बताया कि यह सुनकर मैं एक तरह से टूट गयी थी। दिल्ली में मेरे परिवार के लोग रहते हैं जिन्होंने तत्काल वैभव को दिल्ली ले जाकर जीवी पंथ अस्पताल में भर्ती कराया। जांच पड़ताल के बाद ब्रेन ट्यूमर का आपरेशन हुआ। कुछ दिन बाद ठीक होकर बाहर आ गया लेकिन वैभव का कष्ट कम नहीं हुआ। बाद में पता चला कि उसे ब्रेन में कैंसर भी है। परिवार वाले उसे डेलही स्टेट कैंसर इंस्टीच्यूट ले गये जहां उसका उपचार चला। इतनी गम्भीर बीमारी होने के बाद भी वैभव कभी भी नहीं घबराया जिसके चलते वह अब पूरी तरह से स्वस्थ है। हैरत की बात यह है कि वह कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी से जंग लगते हुए अपनी पढ़ाई भी जारी रखा। अब वह 6 माह में एक बार रूटीन चेकअप के लिए डेलही स्टेट कैंसर इंस्टीच्यूट जाता है।
    इस बाबत पूछे जाने पर वैभव ने बताया कि इस वर्ष उसने इण्टर पास किया है। अब वह बी-काम में दाखिला लेने जा रहा है। वहीं मां वंदना ने बताया कि मेरी कठिनाई वाले समय में परिवार वाले और रिश्तेदार पूरी तरह से मेरे साथ खड़े रहे। हर कोई अपने सामर्थ्य के अनुसार मदद किया। हम लोगों को उम्मीद ही नहीं बची थी कि मेरा बच्चा जीवित अस्पताल से निकलेगा लेकिन जब वह आंखे खोले हुय आईसीयू से बाहर आया तो मैंने जो महसूस किया जिसे शब्दों में नहीं बताया जा सकता है।

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