जिन्होंने देश की सीमाओं को सुरक्षित रखा, उनके परिवारों के लिये सर्वोच्च प्राथमिकता: आदित्यनाथ
मऊ के ताजोपुर में मुख्यमंत्री ने ‘ग्रामीण सैनिक हॉस्पिटल’ का किया उद्घाटन
सैनिकों सहित आम जनता को समर्पित की आधुनिकतम चिकित्सा व्यवस्था
तेजस टूडे ब्यूरो
संतोष जायसवाल
मऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को मऊ के ताजोपुर स्थित ‘ग्रामीण सैनिक हॉस्पिटल’ का उद्घाटन करते हुए देश के वीर जवानों, भूतपूर्व सैनिकों और ग्रामीण जनता के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। ओजस्वी और प्रभावशाली संबोधन में स्पष्ट रूप से कहा कि जिन जांबाज सैनिकों ने अपनी जवानी और अपना सर्वस्व देश की सीमाओं की रक्षा में होम कर दिया, उनके और उनके आश्रितों के स्वास्थ्य की सर्वोत्तम देखभाल करना राज्य सरकार का परम कर्तव्य है। यह अस्पताल इसी कर्तव्य और सम्मान का एक जीता-जागता प्रतीक है। समारोह में उपस्थित विशाल जनसमुदाय और सैन्य परिवारों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘स्वस्थ भारत’ के विजन को धरातल पर उतारने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पूरी प्रामाणिकता के साथ काम कर रही है। एक समय था जब मऊ और पूरे पूर्वांचल के लोगों को एक सीटी स्कैन, बेहतर डायलिसिस या वेंटिलेटर सुविधा के लिए बनारस, लखनऊ या दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ती थी। उस समय गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों का आधा पैसा सिर्फ आने-जाने और इलाज की व्यवस्था करने में ही खर्च हो जाता था।
मुख्यमंत्री ने कहा की भारत के वीर/माटी के सपूत ग्रामीण सैनिक हॉस्पिटल के संस्थापक सेवानिवृत्त बिग्रेडियर पी0एन0 सिंह ने सेना में अपनी 33 साल की सेवा पूर्ण करके आज ग्रामीण क्षेत्रवासियों के सेवाभाव के दृष्टिगत, स्वास्थ्य,नर्सिंग, आईटीआई जैसे तकनीकी शिक्षा को धरातल पर उतारकर मऊ जनपद के साथ आस—पास के जिलों के शिक्षा को संजोकर कर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य किया है, इसके लिए मैं इन्हे बधाई देता हूँ।
मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार ने इस दर्द को समझा है। आज मऊ के ग्रामीण अंचल ताजोपुर में स्थापित यह सैनिक हॉस्पिटल अत्याधुनिक आईसीयू, आधुनिकतम सीटी स्कैन, डिजिटल एक्स-रे, लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस जैसी क्रिटिकल केयर सुविधाओं से लैस होकर तैयार है। अब पूर्वांचल के किसी भी भाई-बहन को इलाज के अभाव में दम नहीं तोड़ना पड़ेगा।” मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और संवेदनशीलता पर विशेष जोर दिया। अस्पताल प्रशासन एवं डॉक्टरों को कड़े शब्दों में निर्देशित किया कि चिकित्सा के क्षेत्र में व्यावसायिकता से ऊपर सेवाभाव होना चाहिए। जब कोई गरीब या सैनिक परिवार का सदस्य अस्पताल आता है तो डॉक्टरों का मधुर व्यवहार ही उसकी आधी बीमारी को दूर कर देता है। मुख्यमंत्री ने अस्पताल की स्थापना में योगदान देने वाले सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों और संस्थापकों की मुक्त कंठ से प्रशंसा किया। साथ ही कहा कि अनुशासन और सेवा की जो सीख भारतीय सेना देती है, उसी का परिणाम है कि आज ताजोपुर में यह आधुनिक चिकित्सालय खड़ा हो सका है। इस अस्पताल में पूर्व सैनिकों, युद्ध वीरांगनाओं और उनके आश्रितों के लिए विशेष प्राथमिकता और त्वरित उपचार की व्यवस्था की गई है जो सराहनीय है। इस अवसर पर राज्य सरकार के मंत्रीगण, स्थानीय जनप्रतिनिधि, सेना के वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी सहित भारी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे।
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