प्रधानाचार्य ने मास्क बांटकर की सोशल डिस्टेंस बनाये रखने की अपील

पंकज बिन्द महराजगंज, जौनपुर। कोरोना वायरस जैसी विकट महामारी को लेकर सैकड़ो देश परेशान हैं। सभी लोगों के दिलो दिमाग में बस एक ही प्रश्न आ रहा है कि इस महामारी को समाप्त कैसे किया जाए, इसका अंत नहीं किया गया तो हम सभी का अंत निश्चित हैं। दिन-प्रतिदिन यह महामारी अपना दायरा बढ़ाती चली जा रही है। अमेरिका, इटली आदि देशों में अगर देखा जाए तो इस महामारी ने हजारों जिंदगियां को निगल चुकी है। सैकड़ों लोग अस्पताल में अपनी जिंदगी की भीख मांग रहे हैं। आम व्यक्ति से लेकर सभी देश की सरकारें बहुत चिंतित हैं। सभी लोग इस महामारी का उपाय ढूढ़ रहे हैं। जितना हो रहा है, बचाव भी कर रहे हैं। सभी लोग अपने मुताबिक एक-दूसरे की विभिन्न प्रकार से मदद करने में भी आगे बढ़ रहे हैं। सामाजिक संगठन भी तन-मन-धन से भरपूर सहयोग करने में लगी हुई है। सरकार ने भी गरीबों के लिए निःशुल्क राशन, सब्जी, फल-फूल आदि व्यवस्थाएं करके लोगों तक पहुंचाने में लगी हुई है। नेता, अभिनेता, अधिकारी, राजनेता, सामाजिक व्यक्ति आदि लोग अपने आस-पास में निवास कर रहे गरीब, मजदूर, लाचार लोगों की भरपूर सहायता करने में कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इसी कड़ी में स्थानीय जयहिन्द इंटर कालेज तेजी बाजार के प्रधानाचार्य सुभाष चंद्र मिश्र ने गांव में घूम-घूम कर सोशल डिस्टेन्स का पालन करते हुए लोगों से अपील किया कि सभी लोग लॉक डाउन का कड़ाई से पालन करें। मास्क लगाकर रहें। सेनिटाइजर का प्रयोग करते रहें। साबुन से लगातार हाथ को 25 सेकेंड तक धोयें। किसी से हाथ न मिलायें। अपरचित से न बात करें और न ही उन्हें घर में आने दें। इस लॉक डाउन का कड़ाई से पालन करें और जितना हो सके, लोगों से भी अपील करते रहे। गरीबों की भरपूर सहायता करें। इन्होंने अपने गांव के जरूरतमंद लोगों में मास्क का वितरण भी किया तथा इन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से एक विशेष अपील भी किया कि इस महामारी के चलते कार्य कर रहे सभी कर्मचारियों के लिए सरकार ने सुविधाएं मुहैया करवाई हैं। वैसे ही पत्रकारों के लिए जो देश के चौथे स्तंभ कहे जाते हैं जिन्हें भी उन सभी सुविधाओं को प्रदान किया जाय, इनको कोई सैलरी नहीं मिलती है। यह बिना वेतन के कार्य करते है। प्रशासन द्वारा इन पत्रकारों को भी सैलरी दी जाए, ताकि ये लोग भी अपना और परिवार का ख्याल रख सके। इस कोरोना महामारी में अपनी जान की परवाह किये बगैर छोटी-बड़ी खबरों को कलेक्ट करते हैं और देश दुनिया को दिखाते हैं। इन सभी पत्रकारों के बारे में भी सरकार को सोचना चाहिए, यह विचार करने वाला प्रकरण है। अगर ये लोग भी कोरोना वायरस से डर करके घरों में बैठ जायेंगे तो क्या होगा। इनका भी परिवार है। ये भी मेहनत करते हैं।

पंकज बिन्द
महराजगंज, जौनपुर। कोरोना वायरस जैसी विकट महामारी को लेकर सैकड़ो देश परेशान हैं। सभी लोगों के दिलो दिमाग में बस एक ही प्रश्न आ रहा है कि इस महामारी को समाप्त कैसे किया जाए, इसका अंत नहीं किया गया तो हम सभी का अंत निश्चित हैं। दिन-प्रतिदिन यह महामारी अपना दायरा बढ़ाती चली जा रही है। अमेरिका, इटली आदि देशों में अगर देखा जाए तो इस महामारी ने हजारों जिंदगियां को निगल चुकी है। सैकड़ों लोग अस्पताल में अपनी जिंदगी की भीख मांग रहे हैं।

आम व्यक्ति से लेकर सभी देश की सरकारें बहुत चिंतित हैं। सभी लोग इस महामारी का उपाय ढूढ़ रहे हैं। जितना हो रहा है, बचाव भी कर रहे हैं। सभी लोग अपने मुताबिक एक-दूसरे की विभिन्न प्रकार से मदद करने में भी आगे बढ़ रहे हैं। सामाजिक संगठन भी तन-मन-धन से भरपूर सहयोग करने में लगी हुई है। सरकार ने भी गरीबों के लिए निःशुल्क राशन, सब्जी, फल-फूल आदि व्यवस्थाएं करके लोगों तक पहुंचाने में लगी हुई है।

नेता, अभिनेता, अधिकारी, राजनेता, सामाजिक व्यक्ति आदि लोग अपने आस-पास में निवास कर रहे गरीब, मजदूर, लाचार लोगों की भरपूर सहायता करने में कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इसी कड़ी में स्थानीय जयहिन्द इंटर कालेज तेजी बाजार के प्रधानाचार्य सुभाष चंद्र मिश्र ने गांव में घूम-घूम कर सोशल डिस्टेन्स का पालन करते हुए लोगों से अपील किया कि सभी लोग लॉक डाउन का कड़ाई से पालन करें। मास्क लगाकर रहें। सेनिटाइजर का प्रयोग करते रहें। साबुन से लगातार हाथ को 25 सेकेंड तक धोयें। किसी से हाथ न मिलायें।

अपरचित से न बात करें और न ही उन्हें घर में आने दें। इस लॉक डाउन का कड़ाई से पालन करें और जितना हो सके, लोगों से भी अपील करते रहे। गरीबों की भरपूर सहायता करें। इन्होंने अपने गांव के जरूरतमंद लोगों में मास्क का वितरण भी किया तथा इन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से एक विशेष अपील भी किया कि इस महामारी के चलते कार्य कर रहे सभी कर्मचारियों के लिए सरकार ने सुविधाएं मुहैया करवाई हैं।

वैसे ही पत्रकारों के लिए जो देश के चौथे स्तंभ कहे जाते हैं जिन्हें भी उन सभी सुविधाओं को प्रदान किया जाय, इनको कोई सैलरी नहीं मिलती है। यह बिना वेतन के कार्य करते है। प्रशासन द्वारा इन पत्रकारों को भी सैलरी दी जाए, ताकि ये लोग भी अपना और परिवार का ख्याल रख सके। इस कोरोना महामारी में अपनी जान की परवाह किये बगैर छोटी-बड़ी खबरों को कलेक्ट करते हैं और देश दुनिया को दिखाते हैं। इन सभी पत्रकारों के बारे में भी सरकार को सोचना चाहिए, यह विचार करने वाला प्रकरण है। अगर ये लोग भी कोरोना वायरस से डर करके घरों में बैठ जायेंगे तो क्या होगा। इनका भी परिवार है। ये भी मेहनत करते हैं।