होली शब्द का अर्थ और इसका वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक कारण
प्राचीन होलिका पर्व और वर्तमान स्वरूप वास्तव में होली वास्तव में होलका का शब्द से निकला है। होलका का अर्थ कच्चा और आधा पक्का अन्न होता है। होलिका दहन में आज भी अन्न को दहन करने की परंपरा तभी से चली आ रही है लेकिन वास्तव में होली का महापर्व ऋतु परिवर्तन का पर्व है। इसमें गर्मी आने वाली होती है और ठंडी विदा होने वाली होती है। ऋतु परिवर्तन के संक्रमण काल में जब लोग प्राचीन काल में खाली रहते थे तब होली का पर्व शुरू हुआ। इसे प्राचीन काल में अन्न का महापर्व और काम महोत्सव भी कहा जाता था। इस समय लोगों का उत्साह उमंग और उत्तेजना चरम पर होती है। यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुका है। होलिका पर्व के बाद यह तनाव उत्तेजना काफी हद तक दूर हो जाता है।मनोवैज्ञानिक रूप से हर व्यक्ति होली में सहभागिता करके काफी हद तक अपने अकेलेपन की भावना से मुक्त हो जाता है। उसे लगता है कि उसका भी संसार में कोई है।
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