HomeArticleभारतीय नारियां ऊर्जा से लवरेज हैं

भारतीय नारियां ऊर्जा से लवरेज हैं

भारतीय नारियां ऊर्जा से लवरेज हैं

राष्ट्रीय हो या फिर अंतर्राष्ट्रीय,
बालिका दिवस अवश्य मनायें,
बालिकाओं को पैदा तो होने दें,
उन्हें माँ की कोख में पलने तो दें।

बालिका-बालकों का लिंगानुपात,
पूरे भारत में नौ के ऊपर दस का है,
यह अनुपात देश के कई राज्यों में,
लड़कियों से भेदभाव करने से है।

बेटी और बहू में अंतर क्यों है,
बहू को बेटी मानते क्यों नहीं,
बहू पढ़ी लिखी सुशील चाहिये,
तो हर एक बेटी को खूब पढ़ाइये।

बेटी पढ़ेगी तो बहू पढ़ी लिखी होगी,
हर घर, हर परिवार पढ़ा लिखा होगा,
हर गृहस्थी भी समझदारी से चलेगी,
समाज व पूरे राष्ट्र की प्रगति होगी।

भारतीय नारियाँ ऊर्जा से लबरेज हैं,
उनमें दूरदर्शिता, जीवन्त उत्साह है,
प्रतिबद्धता से चुनौतियों का सामना,
करने में जिम्मेदारी पूर्वक सक्षम हैं।

गुरू रवींद्रनाथ टैगोर के शब्दों में
“महिलायें न केवल घर की रोशनी हैं,
बल्कि वे इस रौशनी की लौ भी हैं,
अनादि काल से प्रेरणा की स्रोत हैं।”

बेटियों को घर बाहर दोनों जगह,
जिम्मेदारी स्वतंत्र होकर निभाने दें,
सीता, सावित्री, गार्गी, अनुसुईया,
इंदिरा गांधी, द्रौपदी मुरमू बनने दें।

रानी लक्ष्मीबाई, सरोजिनी नायडू,
ज्योति बा फुले, कल्पना चावला,
सुनीता विलियम्स, संतोष यादव,
मेरी काम्स, आदि के बड़े नाम हैं।

आदित्य बेटी घर की शान हैं,
बहू परिवार की गृह लक्ष्मी हैं,
जहाँ नारी का सम्मान होता है,
वहाँ देवी देवताओं का वास है।

कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
जनपद—लखनऊ

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