आईपीआर के लिये विचार, अन्वेषण और उत्पाद नये होः प्रो. शर्मा

दो  दिवसीय वेबिनार के पहले दिन बतायी गयी पेटेंट की महत्ता सिद्दीकपुर, जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के बौद्धिक सम्पदा अधिकार प्रकोष्ठ की ओर से शुक्रवार को दो दिवसीय वेबिनार का आयोजन किया गया। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने विश्व व्यापार संगठन पर प्रकाश डालते हुये कहा कि भारतीय दवा कंपनियों में विश्व व्यापार संगठन के माध्यम से वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। आयुर्वेद के क्षेत्र में हमारे पास बेहतर विकल्प है। इस पर हमारे युवा वैज्ञानिकों को विचार करने की जरूरत है। इसी क्रम में अध्यक्षीय संबोधन पूविवि के कुलपति प्रो. (डा.) राजाराम यादव ने बौद्धिक सम्पदा अधिकार को भारतीय परिप्रेक्ष्य में समझाया। साथ ही कहा कि कैसे अमेरिका ने नीम का पेटेंट करा लिया था और फिर बाद में बीएचयू के प्रो. यू.पी. सिंह ने उस पेटेंट को निरस्त कराया। वर्तमान और आने वाला समय तकनीकी और नवाचार का युग है। हमें अपनी परम्परागत धरोहर की सम्पदा को संरक्षण के साथ नवाचार के माध्यम से देश में निर्मित नए उत्पादों को संरक्षित करना होगा। नई दिल्ली के वैज्ञानिक एवं टीआईएफएसी पेटेंट के हेड डा. यशवंत देव पवार ने संजीवनी, जीवनी और कोरोना के बाद के संकट पर प्रकाश डाला। सीएसटी की संयुक्त सचिव डा. हुमा मुस्तफा ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शोध कार्य तेजी से हो रहे हैं। इन क्षेत्रों में हमें पेटेंट और बौद्धिक संपदा अधिकार के तहत सचेत रहना चाहिये, ताकि हमारी मेहनत पर अन्य कोई देश पानी न फेर दे। वेबिनार के संयोजक बायोटेक्नोलॉजी विभाग के सह आचार्य डा. मनीष गुप्ता ने इंटेलेक्चुअल प्रापर्टी राइटः प्रोटेक्शन आफ इंटलेक्चुअल प्रापर्टी एण्ड वे फारवर्ड विषय पर प्रकाश डाला। वेबिनार का संचालन रसायन विज्ञान विभाग के डा. नितेश जायसवाल ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डा. सुनील कुमार किया। कार्यक्रम की रूपरेखा प्रो. राम नारायण, डा. राजकुमार, डा. मुराद अली, डा. पुनीत धवन, रामनरेश यादव, प्रशांत यादव, आशीष गुप्ता ने बनाई।

दो दिवसीय वेबिनार के पहले दिन बतायी गयी पेटेंट की महत्ता

सिद्दीकपुर, जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के बौद्धिक सम्पदा अधिकार प्रकोष्ठ की ओर से शुक्रवार को दो दिवसीय वेबिनार का आयोजन किया गया। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने विश्व व्यापार संगठन पर प्रकाश डालते हुये कहा कि भारतीय दवा कंपनियों में विश्व व्यापार संगठन के माध्यम से वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। आयुर्वेद के क्षेत्र में हमारे पास बेहतर विकल्प है।

इस पर हमारे युवा वैज्ञानिकों को विचार करने की जरूरत है। इसी क्रम में अध्यक्षीय संबोधन पूविवि के कुलपति प्रो. (डा.) राजाराम यादव ने बौद्धिक सम्पदा अधिकार को भारतीय परिप्रेक्ष्य में समझाया। साथ ही कहा कि कैसे अमेरिका ने नीम का पेटेंट करा लिया था और फिर बाद में बीएचयू के प्रो. यू.पी. सिंह ने उस पेटेंट को निरस्त कराया। वर्तमान और आने वाला समय तकनीकी और नवाचार का युग है। हमें अपनी परम्परागत धरोहर की सम्पदा को संरक्षण के साथ नवाचार के माध्यम से देश में निर्मित नए उत्पादों को संरक्षित करना होगा।

नई दिल्ली के वैज्ञानिक एवं टीआईएफएसी पेटेंट के हेड डा. यशवंत देव पवार ने संजीवनी, जीवनी और कोरोना के बाद के संकट पर प्रकाश डाला। सीएसटी की संयुक्त सचिव डा. हुमा मुस्तफा ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शोध कार्य तेजी से हो रहे हैं।

इन क्षेत्रों में हमें पेटेंट और बौद्धिक संपदा अधिकार के तहत सचेत रहना चाहिये, ताकि हमारी मेहनत पर अन्य कोई देश पानी न फेर दे। वेबिनार के संयोजक बायोटेक्नोलॉजी विभाग के सह आचार्य डा. मनीष गुप्ता ने इंटेलेक्चुअल प्रापर्टी राइटः प्रोटेक्शन आफ इंटलेक्चुअल प्रापर्टी एण्ड वे फारवर्ड विषय पर प्रकाश डाला। वेबिनार का संचालन रसायन विज्ञान विभाग के डा. नितेश जायसवाल ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डा. सुनील कुमार किया। कार्यक्रम की रूपरेखा प्रो. राम नारायण, डा. राजकुमार, डा. मुराद अली, डा. पुनीत धवन, रामनरेश यादव, प्रशांत यादव, आशीष गुप्ता ने बनाई।

दो दिवसीय वेबिनार के पहले दिन बतायी गयी पेटेंट की महत्ता  सिद्दीकपुर, जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के बौद्धिक सम्पदा अधिकार प्रकोष्ठ की ओर से शुक्रवार को दो दिवसीय वेबिनार का आयोजन किया गया। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने विश्व व्यापार संगठन पर प्रकाश डालते हुये कहा कि भारतीय दवा कंपनियों में विश्व व्यापार संगठन के माध्यम से वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। आयुर्वेद के क्षेत्र में हमारे पास बेहतर विकल्प है। इस पर हमारे युवा वैज्ञानिकों को विचार करने की जरूरत है। इसी क्रम में अध्यक्षीय संबोधन पूविवि के कुलपति प्रो. (डा.) राजाराम यादव ने बौद्धिक सम्पदा अधिकार को भारतीय परिप्रेक्ष्य में समझाया। साथ ही कहा कि कैसे अमेरिका ने नीम का पेटेंट करा लिया था और फिर बाद में बीएचयू के प्रो. यू.पी. सिंह ने उस पेटेंट को निरस्त कराया। वर्तमान और आने वाला समय तकनीकी और नवाचार का युग है। हमें अपनी परम्परागत धरोहर की सम्पदा को संरक्षण के साथ नवाचार के माध्यम से देश में निर्मित नए उत्पादों को संरक्षित करना होगा। नई दिल्ली के वैज्ञानिक एवं टीआईएफएसी पेटेंट के हेड डा. यशवंत देव पवार ने संजीवनी, जीवनी और कोरोना के बाद के संकट पर प्रकाश डाला। सीएसटी की संयुक्त सचिव डा. हुमा मुस्तफा ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शोध कार्य तेजी से हो रहे हैं। इन क्षेत्रों में हमें पेटेंट और बौद्धिक संपदा अधिकार के तहत सचेत रहना चाहिये, ताकि हमारी मेहनत पर अन्य कोई देश पानी न फेर दे। वेबिनार के संयोजक बायोटेक्नोलॉजी विभाग के सह आचार्य डा. मनीष गुप्ता ने इंटेलेक्चुअल प्रापर्टी राइटः प्रोटेक्शन आफ इंटलेक्चुअल प्रापर्टी एण्ड वे फारवर्ड विषय पर प्रकाश डाला। वेबिनार का संचालन रसायन विज्ञान विभाग के डा. नितेश जायसवाल ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डा. सुनील कुमार किया। कार्यक्रम की रूपरेखा प्रो. राम नारायण, डा. राजकुमार, डा. मुराद अली, डा. पुनीत धवन, रामनरेश यादव, प्रशांत यादव, आशीष गुप्ता ने बनाई।
Deepak Jaiswal 7007529997, 9918557796
आप लोगों भरपूर सहयोग और प्यार की वजह से तेजस टूडे डॉट कॉम आज Google News और Dailyhunt जैसे बड़े प्लेटर्फाम पर जगह बना लिया है। आज इसकी पाठक संख्या लगातार बढ़ रही है और इसके लगभग 2 करोड़ विजिटर हो गये है। आपका प्यार ऐसे ही मिलता रहा तो यह पूर्वांचल के साथ साथ भारत में अपना एक अलग पहचान बना लेगा।