लाखों का घोटाला होने के बाद से अब तक नहीं उबर सका सूची ग्रामसभा
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लाखों का घोटाला होने के बाद से अब तक नहीं उबर सका सूची ग्रामसभा
पुष्टि के बाद भी वीडीओ की रसूख के आगे बौना साबित हुआ जिले के अधिकारियों की जांच अनुभव शुक्ला/संदीप पाण्डेय सलोन, रायबरेली। जिले में भ्रष्टाचार की जड़ें इस कदर अंगद की तरह पैर जमा चुकी हैं कि उसे हिलाने की सोच रखने वाले को भ्रष्टाचारियों के आगे पराजय का मुंह देखना पड़ता है। इसका जीता जागता उदाहरण आपको देखना है तो आप सलोन ब्लाक चले आइए। जहां आपको तैनात ग्राम विकास अधिकारी आलोक रंजन मिलेंगे। अब उन्हें भले ही अन्य ग्राम सभाओं की जिम्मेदारी दी गई हो किंतु बीते वर्ष 2018 में तैनाती के दौरान लाखों रुपए के भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे और जांच में लाखों रुपए के सरकारी धन में घोटाले की पुष्टि होने के बावजूद साहबों पर सिक्कों की खनक व रसूख की हनक का प्रभाव इस कदर डाला की 2018 से लेकर अब की जांच में कार्यवाही को फाइलों में ही दफन करवा दिया है।
यदि सूत्रों की मानें तो डीपीआरओ कार्यालय में तैनात एक बाबू कारनामों में पर्दा डलवाने में मुख्य भूमिका अदा करता है। बताते चलें कि हम बात सूची ग्राम सभा की कर रहे हैं जहां बीते वर्ष 2018 में गांव निवासी योगेंद्र प्रताप ने ग्राम पंचायत नियमावली (1997 ग्राम प्रधानों का हटाया जाना) के तहत जिले के आला अधिकारियों से शिकायत कर जांच की मांग की जिसमें जांच उपरांत स्ट्रीट लाइट, पीएम आवास के साथ लगभग 150 ऐसे स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय का बजट निकाल लिया गया जिनको ब्लाक स्तर पर सूचीबद्ध तरीके से पूर्ण तो दिखाया गया किंतु मौके पर ग्रामीणों के खाते में न पैसा पहुंचा और न ही उनको शौचालय का लाभ मिल पाया। इस लाखों रुपए की सरकारी धन के घपले की पुष्टि होते ही विकास विभाग के महकमे में हड़कंप मच गया। यहां तक कि ग्राम विकास अधिकारी से लेकर खंड विकास अधिकारी व ग्राम प्रधान, ग्राम रोजगार सेवक पर प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई। यह पूरा मामला अखबारों की सुर्खियों में भी बना रहा।
जिला स्तरीय अधिकारियों ने कई बार जांच किया जिसमें घोटाले की पुष्टि हुई जिसके बावजूद मुख्य दोषी तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी आलोक रंजन पर कार्यवाही न कर सिर्फ ग्राम प्रधान से ठेका दिलवाकर आनन फानन में सूची ग्रामसभा में कुछ ग्रामीणों के घर के सामने बालू व पीले ईंटों से महज एक व दो फीट का गड्ढा खुदवाकर मानक के विपरीत शौचालय का निर्माण करवा भ्रष्टाचार पर पर्दा डाल दिया गया। आखिर साहब कब तक कार्यवाही प्रचलित है कि झूठी आख्या लगाकर गुमराह करते रहेंगे। यह एक सबसे बड़ा अहम सवाल बना हुआ है। हालांकि तेजस टूडे की टीम ऐसे भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही करवाने तक खबर प्रकाशित करता रहेगा।
आलोक अब तक बचे सुनील थे नपे, साहबों की बनी है छत्रछाया यदि देखा जाए तो सूची ग्राम सभा के तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी रहे आलोक रंजन के भ्रष्टाचार का जैसे ही खुलासा हुआ, उनका तबादला अन्य क्षेत्र में कर दिया गया। इसके बाद सुशील भास्कर ग्राम विकास अधिकारी सूची ग्राम सभा के नियुक्त हुए जो डीह ब्लाक में भ्रष्टाचार के आरोपों से घिर कर सलोन ब्लाक का दामन थाम लिये। उन्होंने भी लगभग भ्रष्टाचार को अंजाम देने में कोर कसर नहीं छोड़ा जिसके बाद ग्राम विकास अधिकारी सुनील भास्कर के विरुद्ध निलंबन तक की कार्यवाही हुई किंतु भ्रष्टाचार के मुख्य दोषी रहे ग्राम विकास अधिकारी आलोक रंजन पर अब तक में साहब अपनी छत्रछाया क्यों बना रखी है? इन प्रश्नों का उत्तर मिलना मील का पत्थर साबित हो रहा हैं। अब देखना यह है कि जिले के हकीम भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे ग्राम विकास अधिकारी पर कार्यवाही करेंगे या फिर कारनामों पर पर्दा डाल फाइलों तक ही कार्यवाही सिमट कर रह जायेगी। आखिर भ्रष्टाचारियों से लूटी सूची ग्राम सभा को कब न्याय मिलेगा….? डीएम साहिबा न्याय दिला पायेगी या फिर भ्रष्टाचार के पाप को जांच के नाम पर धुला दिया जायेगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
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