सम्पादकों व पत्रकारों के लिये भी सरकारें सोचेंः मेंहदी हुसैन रिजवी

जौनपुर। सम्पादक मण्डल के वारिष्ठ उपाध्यक्ष मेंहदी हुसैन रिजवी ने कहा कि कोरोना जैसी खतरनाक महामारी के प्रकोप के कारण मीडिया जगत को भारी नुकसान पहुंच रहा है। पहले से ही आर्थिक संकट झेल रहे समाचार पत्रों को विज्ञापन न मिलने से बड़ी संख्या में सम्पादकों को समाचार पत्र बंद करना पड़ रहा है। वैसे भी जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीणांचलों में काम करने वाले पत्रकारों को जीवन यापन करने में बहुत कठिनाई होती है। इधर लॉक डाउन के चलते तमाम समाचार पत्रों के सम्पादक अपने कर्मचारियों को वेतन देने में हाथ खड़े कर दिये हैं, क्योंकि उनकी खुद की आमदनी काफी प्रभावित हो गयी है। फिलहाल कुछ सम्पादक तो अपने कार्य का निर्वहन कर रहे हैं लेकिन बड़ी संख्या में समाचार पत्र व चैनल बंद हो सकते हैं जिससे हजारों पत्रकार बेरोजगार हो जायेंगे। सम्पादक मण्डल के अध्यक्ष राकेश पाण्डेय, महामंत्री रामजी जायसवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष शम्भू सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में टीवी चैनल व कुछ समाचार पत्र आर्थिक संकट से जूझते हुये दम तोड़ दिये हैं। वहीं अपने को बड़ा व प्रमुख बनने वाले कुछ समाचार पत्रों ने वर्तमान की आर्थिक संकट के बहाने तमाम पत्रकारों को नौकरी से निकाल दिया है। केन्द्र व राज्य सरकारों से पहले से ही बहुत कम विज्ञापन मिल रहा है जबकि वर्तमान की स्थिति और खराब हो गयी है। कोरोना जैसी महामारी में बचाव, उपाय आदि की जानकारी देने में मीडिया बड़ी भूमिका निभा रही है लेकिन अपेक्षित सहयोग न मिलने से निराश भी है। श्री रिजवी ने सम्पादक मण्डल की तरफ से मांग किये कि केन्द्र व राज्य सरकारें पत्रकारों के लिये विशेष पैकेज देने की घोषणा करें, क्योंकि उत्तर प्रदेश समेत लगभग सभी राज्यों में पत्रकारों के समक्ष आर्थिक संकट पैदा हो गयी है। उन्होंने पत्रकारों के लिये सरकारी स्तर पर जीवन बीमा योजना शुरू करने की भी आवाज उठायी है।

जौनपुर। सम्पादक मण्डल के वारिष्ठ उपाध्यक्ष मेंहदी हुसैन रिजवी ने कहा कि कोरोना जैसी खतरनाक महामारी के प्रकोप के कारण मीडिया जगत को भारी नुकसान पहुंच रहा है। पहले से ही आर्थिक संकट झेल रहे समाचार पत्रों को विज्ञापन न मिलने से बड़ी संख्या में सम्पादकों को समाचार पत्र बंद करना पड़ रहा है। वैसे भी जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीणांचलों में काम करने वाले पत्रकारों को जीवन यापन करने में बहुत कठिनाई होती है।

इधर लॉक डाउन के चलते तमाम समाचार पत्रों के सम्पादक अपने कर्मचारियों को वेतन देने में हाथ खड़े कर दिये हैं, क्योंकि उनकी खुद की आमदनी काफी प्रभावित हो गयी है। फिलहाल कुछ सम्पादक तो अपने कार्य का निर्वहन कर रहे हैं लेकिन बड़ी संख्या में समाचार पत्र व चैनल बंद हो सकते हैं जिससे हजारों पत्रकार बेरोजगार हो जायेंगे। सम्पादक मण्डल के अध्यक्ष राकेश पाण्डेय, महामंत्री रामजी जायसवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष शम्भू सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में टीवी चैनल व कुछ समाचार पत्र आर्थिक संकट से जूझते हुये दम तोड़ दिये हैं।

वहीं अपने को बड़ा व प्रमुख बनने वाले कुछ समाचार पत्रों ने वर्तमान की आर्थिक संकट के बहाने तमाम पत्रकारों को नौकरी से निकाल दिया है। केन्द्र व राज्य सरकारों से पहले से ही बहुत कम विज्ञापन मिल रहा है जबकि वर्तमान की स्थिति और खराब हो गयी है। कोरोना जैसी महामारी में बचाव, उपाय आदि की जानकारी देने में मीडिया बड़ी भूमिका निभा रही है लेकिन अपेक्षित सहयोग न मिलने से निराश भी है। श्री रिजवी ने सम्पादक मण्डल की तरफ से मांग किये कि केन्द्र व राज्य सरकारें पत्रकारों के लिये विशेष पैकेज देने की घोषणा करें, क्योंकि उत्तर प्रदेश समेत लगभग सभी राज्यों में पत्रकारों के समक्ष आर्थिक संकट पैदा हो गयी है। उन्होंने पत्रकारों के लिये सरकारी स्तर पर जीवन बीमा योजना शुरू करने की भी आवाज उठायी है।