अंग्रेज अधिकारी का महिमामंडन, शहीदों को भूला दिया
तेजस टूडे ब्यूरो
एनके मिश्र
लखीमपुर खीरी। आतताई कलेक्टर रहे विलोबी आईसीएस का मर्डर तलवार से सर काटकर 20 अगस्त 1920 को तीन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने कर दिया था। तीनों को मौत की सजा हुई। आजादी के बाद यूपी सरकार ने तीनों को शहीद का दर्जा दिया। आजादी के 79 साल बाद भी इन शहीदों का शिलापट भी जिले में नही लगा है। अंग्रेजों ने 1920 में ही विलोबी की स्मृति में मेमोरियल हॉल बनवाया। 1924 में विलोबी मेमोरियल ट्रस्ट का पंजीकरण हुआ। ट्रस्ट का सचिव अंग्रेजो ने सरस्वती प्रसाद को बनाया। 101 साल से इसी परिवार का सचिव चल रहा है। 60 दुकानें हैं। विशाल मैदान है। हाल है। प्रति वर्ष किराए का कई लाख रुपया आता है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित नन्द कुमार मिश्र ने बताया कि वह ननिहाल में पैदा हुए। नाना रामआसरे शुक्ला करीब 10 वर्ष आजादी की लड़ाई में जेल में रहे। 32 दांत तोड़ दिए गए। 12 बेंत की सजा दी गई। मामा हरिराम शुक्ल भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे। दो वर्ष से विलोबी का नाम ट्रस्ट से हटाने को लेकर प्रयासरत हैं। पूर्व डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने समुचित जवाब नहीं दिया। वर्तमान डीएम के आते ही फिर मैंने अनुरोध किया गया। अभी डीएम का कोई सन्तोष जनक उत्तर नही मिला है। ट्रस्ट से विलोबी का नाम हटाने की कार्यवाई करें।
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