फेसबुक प्रेमी डलमऊ थानाध्यक्ष पुलिस सोशल मीडिया पॉलिसी का धड़ल्ले से कर रहे उल्लंघन, कानून व्यवस्था धड़ाम
15 मई को एडीजी ने भी जारी किया था पत्र, फिर भी इंस्पेक्टर पर चढ़ा सोशल मीडिया का भूत
मारपीट के गम्भीर मामलों में भी एनसीआर दर्ज करके किया जा रहा निपटारा, डम्फरों से लाल हो रहीं सड़कें
तेजस टूडे सं.
अनुभव शुक्ला
रायबरेली। बड़ा करें तो रास लीला छोटा करे तो करेक्टर ढीला चंद लाइन की कहावत डलमऊ के फेसबुकिया प्रेमी थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर राघवन पर बिल्कुल सही चरितार्थ साबित हो रही है। सिस्टम पर सवाल उठना लाजिमी है कि जब तीन स्टार लगाने वाले इंस्पेक्टर के सर पर ही जब सोशल मीडिया का भूत चढ़ जायेगा तो आखिर निचले पायदान पर तैनात उपनिरीक्षक व सिपाही भला रील बाजी से कब चूकेंगे?
विदित हो कि बीते वर्ष फरवरी 2023 में उत्तर प्रदेश पुलिस सोशल मीडिया पॉलिसी में विभिन्न प्रकार का निर्देश प्रदेश भर के पुलिस कर्मियों को दिया गया था जिसमें पुलिसकर्मियों को फेसबुक व इंस्ट्राग्राम पर वर्दी में रील व फोटो डालने के प्रतिबंधित करते हुए उल्लंघन पर कार्यवाही की चेतावनी दी गई थी जिसके बाद भी रायबरेली जिले में तैनात इंस्पेक्टर राघवन ही नहीं जिले में ऐसे कई सिपाही व उपनिरीक्षक हैं जो फेसबुक व इंस्ट्राग्राम में वीडियो व रील अपलोड कर उच्चाधिकारियों के निर्देश का उल्लघंन करते चले आ रहे थे। इसी बीच बीती 15 मई को एक बार फिर से अधिकारिक एक्स एकाउंट के माध्यम से एक पत्र दिखा जिसमें पुलिस महानिदेशक मुख्यालय से अपर पुलिस महानिदेशक अमिताभ यश ने भी उत्तर प्रदेश पुलिस सोशल मीडिया पॉलिसी का सख्ती से पालन करने की चेतावनी व उल्लंघन करने वालों पर कार्यवाही को लेकर चेताया था।
इतना सख्त निर्देश होने के बावजूद डलमऊ थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर राघवन पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। आये दिन फिल्मी तरानों में वर्दी के साथ वीडियो रील फेसबुक इंस्ट्राग्राम पर पड़ रही है जिससे बुद्धिजीवी वर्गों का मानना है कि सोशल मीडिया पालिसी व एडीजी द्वारा हाल ही में जारी निर्देशों का घोर उल्लंघन है। सूत्रों कि मानें तो इंस्पेक्टर राघवन सिंह जिले के धाकड़ इंस्पेक्टरों में गिने जाते हैं। पुलिस अधीक्षक कोई भी हो किंतु दबदबा डलमऊ वाले साहब का रहता है। हिम्मत करके तत्कालीन एसपी आलोक प्रियदर्शी ने सदर कोतवाली से इंस्पेक्टर राघवन को लाइन भेज दिया था किंतु उनके जाते ही तत्कालीन एसपी यशवीर सिंह के कार्यकाल से लेकर अब तक में साहब की ही तूती बोलती चली आ रही है।
सलोन थाना में विवादों में घिरने के बाद मौजूदा मंत्री व विधायक के धरने पर संगठन के साथ बैठने के बाद साहब का कोई बाल बांका नहीं कर सका। बस फर्क इतना पड़ा कि सलोन थाना से साहब को हटाकर डलमऊ थानाध्यक्ष की कमान सौंप दी गई जहां की वर्तमान समय में कानून व्यवस्था भी धड़ाम हो चुकी है। दूर की बात तो कौन करे डलमऊ कस्बा में इनकी तैनाती से लेकर अब तक में दर्जन भर मौतें हो चुकी हैं किंतु पुलिसिया यातायात व्यवस्था जस की तस है।
पुलिसिया लापरवाही से विवाहिता की हुई मौत, खोपड़ी हुई लाल, मुकदमे की जगह दर्ज हुई एनसीआर
यूं तो डलमऊ पुलिस के लापरवाही भरे कारनामों के आधा दर्जन से अधिक मामले हैं जिसमें से हम आपको 3 मामलों सिलसिलेवार बता रहे हैं। पहला मामला जहां दहेज की मांग ने एक और बेटी की जान ले ली। वहीं दूसरा मामला घुरवारा चौकी क्षेत्र के नानी का पुरवा उर्फ कर्कशा गांव में 12 मई 2026 को पति नरेंद्र ने अपनी पत्नी अनामिका को लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा। गंभीर हालत में परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचें जहां से हालत नाजुक होने पर लखनऊ रेफर किया गया लेकिन इलाज के दौरान अनामिका ने दम तोड़ दिया।परिजनों का आरोप था कि घटना वाले दिन जब वह शिकायत लेकर थाने पहुंचे तो उन्हें सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक बैठाए रखा गया और समय पर कार्यवाही नहीं हुई। परिवार का कहना है कि अगर पुलिस समय रहते कदम उठाती, तो शायद अनामिका की जान बच सकती थी। मृतका अनामिका की शादी डेढ़ साल पहले महेशपुर गांव में हुई थी। वहीं तीसरा मामला बीती 19 मई को डलमऊ कस्बा निवासी रामनरेश सोनकर के पप्पू, मानवेन्द्र व छोटू ने सड़क पर बेरहमी से पीटा था जिन पर सिर्फ एनसीआर दर्ज कर छोड़ दिया गया। वहीं बीती 23 मई को देवली गांव निवासी शम्भू प्रसाद को दबंग कालिका प्रसाद, केशव सचिन, सहित कई लोगों ने जमकर पीटा लहू-लुहान पीड़ित गुहार लगाता रहा। दबंगों पर प्रभावी कार्यवाही न कर सिर्फ खाना पूरी की गई जिससे यह कहना मुश्किल नहीं है कि इंस्पेक्टर राघवन की लचर कार्यशैली के चलते डलमऊ थाना की कानून व्यवस्था पूरी तरह से धड़ाम हो चुकी है।
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