श्रीकृष्ण-सुदामा प्रसंग सुनकर भावुक हुये श्रद्धालुगण
कथा समापन पर पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द
तेजस टूडे ब्यूरो
मुकेश तिवारी
झांसी। सिविल लाइन ग्वालियर रोड स्थित कुंज बिहारी मंदिर में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के अंतिम दिवस बुंदेलखंड धर्माचार्य महंत राधामोहन दास महाराज ने कहा कि कलियुग भगवान के भक्तों का सेवक है। जो व्यक्ति सच्चे मन से प्रभु भक्ति करता है, उसे किसी भय की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने कहा कि भगवान के भक्तों का कोई बाहरी या आंतरिक शत्रु कुछ नहीं बिगाड़ सकता। काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे विकार भी प्रभु भक्ति के सामने समाप्त हो जाते हैं। कथा के दौरान महंत ने श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि गुरु और मित्र से कभी छल-कपट नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि संदीपन आश्रम में शिक्षा के दौरान सुदामा द्वारा अकेले चने खाने और भगवान श्रीकृष्ण से असत्य बोलने का प्रसंग जीवन में सत्य और निष्ठा का संदेश देता है। महंत ने कहा कि जब-जब जीव परमात्मा से दूर होता है, तब-तब उसे दुख और अभाव घेर लेते हैं। कथा में कृष्ण-उद्धव संवाद और गोपियों के विरह प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भाव—विभोर कर दिया। “अरे द्वार पालों कन्हैया से कह दो” भजन पर श्रद्धालु झूम उठे। कथा के समापन पर जगतगुरु शंकराचार्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती महाराज भी कथा मंडप पहुंचे। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर उनका भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम में आचार्य रामलखन उपाध्याय ने पूजन कराया जबकि व्यवस्थापक पवनदास ने अंत में सभी का आभार व्यक्त किया।
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