गौरक्षा सभी का कर्तव्य, सनातन के लिये गौ माता है शुभ: डा. श्याम सुन्दर
तेजस टूडे ब्यूरो
चित्रकूट। भागवत कथा में पंचम दिवस पर कथा व्यास डॉ. श्याम सुंदर पाराशर महाराज ने कहा इस पृथ्वी पर जब भी अन्याय अत्याचार बढ़ता है। पृथ्वी भगवान के पास जाकर करुण पुकार करती हुई अत्याचारियों की व्यथा का वर्णन करती है। भगवान गौ माता की पुकार सुनकर अभिलंब अवतार ग्रहण करते हैं। आज देश में गाय जो अनाथ की तरह घूम रही है हम उनकी तब तक देख-रेख करते हैं जब तक वह दूध देती है। जैसे ही उन्होंने दूध देना बंद कर दिया कि हम उन गायों को खुला छोड़ देते हैं। एक मां जो जन्म के बाद हमें दूध पिलाकर बड़ा करती है और दूसरी मां गाय जो हमें जीवन भर दूध पिला कर हमारा पोषण करती है और हम उसे अनाथों की तरह त्याग देते हैं। सनातन धर्म को धारण करने वाले सात स्तंभ हैं जिनमें सबसे पहले नाम गौ माता का आता है, इसलिए सनातन धर्म का प्रत्येक कर्म गाय से ही प्रारंभ होता है।
उन्होंने बताया कि पहले धन की तुलना गोवर्धन से होती थी। विवाह में लग्न भी गोधूलि बेला होती है। एक संत को एक स्थान पर कब तक रहना चाहिए जब तक एक गाय दुह ली जाय, इसलिए गौ माता की रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है। आगे कथा में भगवान की बाल लीला का वर्णन करते हुए कहा भगवान ने कृष्ण लीला में सभी गोपी ग्वालों का मनोरथ पूर्ण किया। अपनी बाल लीलाओं से क्यों की ब्रज के जितने भी गोपी ग्वाल है। सभी बड़े-बड़े तपस्वी संत ही ठाकुर की ब्रिज लीला का आनंद लेने ब्रज में गोपी ग्वाल बनकर आए हैं। जब भक्त भगवान को प्राप्त करने के लिए अथक परिश्रम करता है और उस पर भगवान कृपा करते हैं तभी वह भगवान को प्राप्त कर सकता है। जीव परिश्रम और भगवत कृपा का योग जब बनता है तभी परमात्मा साकार रूप में आकर हम पर कृपा बरसाते हैं। भगवान ने ब्रजलीला करते हुए हमें संदेश दिया है कि दूध का जल का और फल का ज्यादा संग्रह नहीं करना चाहिए कृष्ण लीला में तीनों का संग्रह को मुक्त कराया।
गोपियों के माखन दूध चुराकर उनका कल्याण किया फल का संग्रह करने वाले धेनु का सर की बात कर फल मुक्त कर बृजवासियों को खिलाएं। काली नाग का मर्दन करके जल को भी शुद्ध किया पर आज भी कई नाग हमारी यमुना मैया के जल को प्रदूषित कर रहे हैं। हमें जागृत होकर अपनी प्राण दयानी गंगा जमुना को दूषित होने से बचने का प्रयास करना होगा। भगवान ने ब्रिज लीला में सभी का अभिमान तोड़ा ब्रह्मा जी को सृष्टि करता पानी का अभिमान हुआ तो भगवान की परीक्षा लेने के लिए भगवान के बृजवासी गायों को चुराकर अपने लोक में ले गए पर भगवान ने अपनी लीला से स्वयं बृजवासी और गाय बनाकर एक साल तक लीला करी तो ब्रह्मा जी का अभिमान टूटा। इंद्र को अभिमान हुआ तो मूसलाधार पानी बरसाकर भगवान को बृजवासियों सहित बहाना चाहा तो भगवान ने गोवर्धन धारण कर सात दिन सात रात तक अपने बृजवासियों की रक्षा करी और गिरधारी बन गए। कथा में विश्राम में छप्पन भोग ठाकुर जी को लगा।
श्रीमंत राघव दास महाराज मचखेड़ा आश्रम महंत हनुमान मंदिर लोड़वारा पंजाबी भगवान से हरि नारायण दास सुदामा दास महाराज मुख्य यजमान अरुणा मिश्रा, महेन्द्र मिश्र छाया, नलज मिश्र, आनंद मिश्र (डीसीपी दिल्ली), आलोक दुबे (एएसपी मेरठ), दीपा, अभिषेक मिश्र, नेहा, मधुरेश, जगदीश प्रसाद गौतम, वरिष्ठ भाजपा नेता राजेंद्र त्रिपाठी, रवि गुप्ता, छोटा सहित अन्य भक्तगण मौजूद रहे।
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