ठीक हुआ कोरोना मरीज नये मरीजों को दे सकता है जीवनदानः डा. नीरज प्रकाश

जौनपुर। कोरोना पॉजिटिव मरीज जो अब ठीक हो चुके हैं, उनका टेस्ट निगेटिव आ गया है, वे नये कोरोना मरीजों को जीवनदान दे सकते हैं। उक्त बातें जीएसवीएम मेडिकल कालेज कानपुर के हृदय रोग संस्थान में प्रोफेसर व कार्डियो थोरेसिक सर्जन गोल्ड मेडलिस्ट डा. नीरज प्रकाश सिंह ने एक भेंट में कही। उन्होंने कहा कि जब किसी को कोई वायरल रोग होता है और कुछ दिनों बाद जब वह ठीक हो जाता है तो उस ठीक हुये रोगी के शरीर के अन्दर रोग फैलाने वाले उस वायरस से लड़ने की क्षमता बन जाती है। फलस्वरूप जिस वायरस ने रोगी को संक्रमित किया था, उस वायरस से उस व्यक्ति को दुबारा रोग नहीं होता। डा. सिंह ने कहा कि कोरोना कोविड 19 भी एक वायरस है। कोई व्यक्ति कोरोना कोविड 19 से संक्रमित हो जाता है और उसका टेस्ट पॉजिटिव आ जाता है तो कोरोना के लक्षण उसमें पैदा होने लगते हैं। रोगी कुछ दिन बाद या ठीक हो जाता है या मर जाता है। अगर बच गया तो उसके शरीर के अन्दर कोविड 19 वायरस से लड़ने की क्षमता पैदा हो जाती है जो उसे दुबारा कोरोना कोविड 19 से संक्रमित होने से रोकेगा। अगर उस ठीक हुये व्यक्ति के ब्लड प्लाज्मा को किसी नये कोरोना कोविड 19 रोगी के खून में चढ़ा दिया जाय तो उस कोरोना रोग में तेजी से सुधार होगा और ठीक हो सकता है। कोरोना की न कोई दवा बनी है और न टीका। ऐसी परिस्थिति में यह उपचार हत्यारे कोरोना से लोगों की जान बचाने का सबसे सस्ता उपाय होगा। डा. नीरज बताते हैं कि हर इन्सान के खून में द्रव और ठोस दोनों होता है। ठोस भाग में रक्त कणिकाएं होती हैं और द्रव भाग को प्लाज्मा कहा जाता है। रक्त को सेन्ट्री फ्यूज करके प्लाज्मा अलग किया जा सकता है। कोरोना से ठीक हुये रोगी का ब्लड लेकर उसमें से प्लाज्मा अलग कर नये कोरोना रोगी के खून में चढ़ाना बहुत आसान और सस्ता है। इस तरह कोरोना से ठीक हुआ रोगी किसी नये कोरोना रोगी को जीवनदान दे सकता है। कारोना से जूझ रही दुनिया के लिये यह एक खोज क्रांतिकारी होगी।

जौनपुर। कोरोना पॉजिटिव मरीज जो अब ठीक हो चुके हैं, उनका टेस्ट निगेटिव आ गया है, वे नये कोरोना मरीजों को जीवनदान दे सकते हैं। उक्त बातें जीएसवीएम मेडिकल कालेज कानपुर के हृदय रोग संस्थान में प्रोफेसर व कार्डियो थोरेसिक सर्जन गोल्ड मेडलिस्ट डा. नीरज प्रकाश सिंह ने एक भेंट में कही। उन्होंने कहा कि जब किसी को कोई वायरल रोग होता है और कुछ दिनों बाद जब वह ठीक हो जाता है तो उस ठीक हुये रोगी के शरीर के अन्दर रोग फैलाने वाले उस वायरस से लड़ने की क्षमता बन जाती है।

फलस्वरूप जिस वायरस ने रोगी को संक्रमित किया था, उस वायरस से उस व्यक्ति को दुबारा रोग नहीं होता। डा. सिंह ने कहा कि कोरोना कोविड 19 भी एक वायरस है। कोई व्यक्ति कोरोना कोविड 19 से संक्रमित हो जाता है और उसका टेस्ट पॉजिटिव आ जाता है तो कोरोना के लक्षण उसमें पैदा होने लगते हैं। रोगी कुछ दिन बाद या ठीक हो जाता है या मर जाता है।

अगर बच गया तो उसके शरीर के अन्दर कोविड 19 वायरस से लड़ने की क्षमता पैदा हो जाती है जो उसे दुबारा कोरोना कोविड 19 से संक्रमित होने से रोकेगा। अगर उस ठीक हुये व्यक्ति के ब्लड प्लाज्मा को किसी नये कोरोना कोविड 19 रोगी के खून में चढ़ा दिया जाय तो उस कोरोना रोग में तेजी से सुधार होगा और ठीक हो सकता है। कोरोना की न कोई दवा बनी है और न टीका। ऐसी परिस्थिति में यह उपचार हत्यारे कोरोना से लोगों की जान बचाने का सबसे सस्ता उपाय होगा।

डा. नीरज बताते हैं कि हर इन्सान के खून में द्रव और ठोस दोनों होता है। ठोस भाग में रक्त कणिकाएं होती हैं और द्रव भाग को प्लाज्मा कहा जाता है। रक्त को सेन्ट्री फ्यूज करके प्लाज्मा अलग किया जा सकता है। कोरोना से ठीक हुये रोगी का ब्लड लेकर उसमें से प्लाज्मा अलग कर नये कोरोना रोगी के खून में चढ़ाना बहुत आसान और सस्ता है। इस तरह कोरोना से ठीक हुआ रोगी किसी नये कोरोना रोगी को जीवनदान दे सकता है। कारोना से जूझ रही दुनिया के लिये यह एक खोज क्रांतिकारी होगी।