टिक-टोक को बैन करने के लिय वस्त्र दान फाउंडेशन ने पीएमओ कार्यलाय में ज्ञापन दिया

वाराणसी। वस्त्र दान फाउंडेशन के संस्थापक सुधांशु सिंह का कहना हैं कि टिक टोक एक चाइनिज ऐप हैं और आज के समय मे टिक-टोक समाज मे बच्चे और बच्चियों की मानसिकता पर बहुत गंदा असर पड़ रहा हैं और देखा जाय तो 20% लोग विडियो बनाते वक्त अपनी जान भी गवा देते हैं, हमारे देश मे 80 प्रतिशत लोग टिक टोक ऐप का इस्तेमाल करते हैं, और उसमें से ज्यादातर लोग अश्लील विडियो बना कर अपलोड कर देते हैं। वहीं ये विडियो देख बच्चो की, मानसिकता बदल जाती हैं। अगर इस ऐप को देश मे बैन नही किया गया तो आने वाले समय मे बच्चे फेमस होने के लिए नग्न होना शुरु कर देंगे। हम सभी की ज़िम्मेदारी हैं कि हम सभी थोड़ा-थोड़ा प्रयास करे तभी टिक-टोक जैसे ऐप को देश मे बैन कर सकते हैं।

वाराणसी। वस्त्र दान फाउंडेशन के संस्थापक सुधांशु सिंह का कहना हैं कि टिक टोक एक चाइनिज ऐप हैं और आज के समय मे टिक-टोक समाज मे बच्चे और बच्चियों की मानसिकता पर बहुत गंदा असर पड़ रहा हैं और देखा जाय तो 20% लोग विडियो बनाते वक्त अपनी जान भी गवा देते हैं, हमारे देश मे 80 प्रतिशत लोग टिक टोक ऐप का इस्तेमाल करते हैं, और उसमें से ज्यादातर लोग अश्लील विडियो बना कर अपलोड कर देते हैं। वहीं ये विडियो देख बच्चो की, मानसिकता बदल जाती हैं। अगर इस ऐप को देश मे बैन नही किया गया तो आने वाले समय मे बच्चे फेमस होने के लिए नग्न होना शुरु कर देंगे। हम सभी की ज़िम्मेदारी हैं कि हम सभी थोड़ा-थोड़ा प्रयास करे तभी टिक-टोक जैसे ऐप को देश मे बैन कर सकते हैं।

 

वाराणसी। वस्त्र दान फाउंडेशन के संस्थापक सुधांशु सिंह का कहना हैं कि टिक टोक एक चाइनिज ऐप हैं और आज के समय मे टिक-टोक समाज मे बच्चे और बच्चियों की मानसिकता पर बहुत गंदा असर पड़ रहा हैं और देखा जाय तो 20% लोग विडियो बनाते वक्त अपनी जान भी गवा देते हैं, हमारे देश मे 80 प्रतिशत लोग टिक टोक ऐप का इस्तेमाल करते हैं, और उसमें से ज्यादातर लोग अश्लील विडियो बना कर अपलोड कर देते हैं। वहीं ये विडियो देख बच्चो की, मानसिकता बदल जाती हैं। अगर इस ऐप को देश मे बैन नही किया गया तो आने वाले समय मे बच्चे फेमस होने के लिए नग्न होना शुरु कर देंगे। हम सभी की ज़िम्मेदारी हैं कि हम सभी थोड़ा-थोड़ा प्रयास करे तभी टिक-टोक जैसे ऐप को देश मे बैन कर सकते हैं।

 

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