महिलाओं को न्याय दिलाने की रणनीतियों पर 5 जिलों के अधिवक्ता हुये एकजुट
नये कानूनों के प्रभावों पर हुई चर्चा, अधिवक्ताओं ने साझा किये अनुभव
तेजस टूडे ब्यूरो
रूपा गोयल
बांदा। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) लागू होने के बाद महिलाओं के जीवन और न्यायिक प्रक्रिया पर पड़ रहे प्रभावों पर चर्चा के लिए वनांगना संस्था द्वारा रविवार को जिला अधिवक्ता संघ सभागार में एक दिवसीय विधिक सेमिनार आयोजित हुआ जहां बाँदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा और फतेहपुर के लगभग 90 अधिवक्ताओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत वानांगना की निदेशक पुष्पा शर्मा द्वारा अतिथियों एवं प्रतिभागियों के स्वागत के साथ हुई। इस अवसर पर रिसोर्स पर्सन अधिवक्ता अंचल गुप्ता, बोर्ड सचिव दीप्ता भोग, अधिवक्ता संघ अध्यक्ष विमल सिंह, महासचिव राजेश त्रिपाठी एवं कोषाध्यक्ष सुशील कुमार सिंह का सम्मान किया गया।
शबीना मुमताज़ ने बताया कि संस्था पिछले 35 वर्षों से चित्रकूट और बाँदा में महिलाओं के खिलाफ हिंसा, महिला अधिकारों और न्याय तक पहुंच के मुद्दों पर कार्य कर रही है तथा वर्ष 2026 से महोबा में भी संस्था ने कार्य शुरू किया है। सेमिनार का उद्देश्य बीएनएस-बीएनएसएस के प्रभावों, धारा 125 और घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों में कानूनी रणनीतियों पर विचार-विमर्श करना है।
लखनऊ हाईकोर्ट की अधिवक्ता एवं रिसोर्स पर्सन अंचल गुप्ता ने रजनीश बनाम नेहा तथा इमरान प्रतापगढ़ी बनाम गुजरात राज्य जैसे महत्वपूर्ण मामलों के जजमेंट का उल्लेख करते हुए महिलाओं को भरण-पोषण और संरक्षण से जुड़े मामलों में उपलब्ध कानूनी अवसरों पर चर्चा किया। साथ ही कहा कि अधिवक्ताओं को महिलाओं को सरकारी योजनाओं और कानूनी अधिकारों से जोड़ने में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने घरेलू हिंसा अधिनियम के मामलों में डीआईआर (डोमेस्टिक इंसीडेंट रिपोर्ट) मिलने में होने वाली देरी का उल्लेख करते हुए प्रभावी कानूनी रणनीति अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सेमिनार के दौरान अधिवक्ता महेश गुप्ता, राजेंद्र वीर सिंह (हमीरपुर), अनिल कुमार (चित्रकूट), नियाज़ अहमद, फहीम खान, सैय्यद अली मंज़र, शिव कुमार मिश्रा, अपूर्वा (लखनऊ), संदीप मिश्रा (महोबा), आशुतोष सिंह, साधना, श्याम सुंदर, मज़हर हुसैन (फतेहपुर) सहित अधिवक्ताओं ने महिला मामलों से जुड़े अपने जमीनी अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के मामलों में कानूनी जानकारी के साथ संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना भी आवश्यक है।
दीप्ता भोग बोर्ड मेम्बर ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों और न्याय तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक संस्थाओं और अधिवक्ताओं को मिलकर काम करने की जरूरत है। अंत में प्रतिभागियों ने महिलाओं के अधिकारों और नए कानूनों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया। बोर्ड सदस्य कविता बुंदेलखंडी ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में मंजू सोनी, शोभा, श्यामकली, रानी, फरहा, कल्पना, फरजाना, माया, राधेश्याम एवं शिवशंकर का विशेष योगदान रहा।
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