439वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी आयोजित

  • 439वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी आयोजित
तेजस टूडे ब्यूरो
गुड्डन जायसवाल
फतेहपुर। मुराइन टोला हनुमान मंदिर में आयोजित कवि गोष्ठी में साहित्य भूषण कमलेश मौर्य मृदु ने अपने आशु कविताओं से धमाल मचाई। उपस्थित कवियों व श्रोताओं ने बहुत सराहा। शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 439वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन केपी सिंह कछवाह की अध्यक्षता एवं शैलेन्द्र द्विवेदी के संचालन में हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी विजय शुक्ल उपस्थित रहे।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय मंत्री साहित्य भूषण कमलेश मौर्य मृदु द्वारा प्रस्तुत वाणी वंदना से हुआ जिन्होंने मां सरस्वती से वरदान मांगते हुए कहा—— मातु वीणा पाणि तेरा पुत्र टेरता है तुझे करो ना अंबेर मां शरद हस्त धर दो। राष्ट्रीय एकता अखंडता व अस्मिता के प्रति अनुराग सबके हृदय में भर दो। आतंकवादी, उग्रवादी, नक्सलवादियों, जेहादियों की मातु गर्दनें अंतर दो। गजवाये हिंद का जो सपना हैं देख रहे ऐसे राक्षसों की खाल खींच भूसा भर दो। श्री मृदु ने अपने ओजस्वी काव्य पाठ करते हुए गाजियाबाद में जेहादियों द्वारा किए गए सूर्य चौहान हत्याकांड की निन्दा करते हुए आह्वान किया—— तैर रहा गजवाये हिंद का सपना जिन आंखों में, उन आंखों का करना होगा जयंत की भांति निदान। बन फैलाये नाग जेहादी फुफकारते जहां भी, जनमेजय बन नाग यज्ञ का करना होगा विधान।
कार्यक्रम को गति देते हुए कवि गोष्ठी के अध्यक्ष केपी कछवाह ने काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार से अपने अंतर्भावों को प्रस्तुत किया- मोह न कर झूठी काया का, यह काया है नश्वर। तू अविनाशी, तू है शाश्वत, अंशी तेरा ईश्वर।। डा. सत्य नारायण मिश्र ने अपने भावों को एक छंद के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किया- यह जीवन कितना परिवर्तित, सुस्थिरता का आभास नहीं। है उदय एक के जीवन में, तो अस्त अन्य का निहित कहीं।। प्रदीप गौड़ ने अपने क्रम में काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार भाव प्रस्तुत किये- है शरीर अनमोल हमारा, हमको ही करनी रक्षा। तंबाकू रोगों का कारक, अभी छोड़ दें तो अच्छा।। डॉ शिव सागर साहू ने पर्यावरण संरक्षण पर बल देते हुए कहा— पर्यावरण सुधार हित सब जन करें उपाय। हरी -भरी धरती करें, पौधे खूब लगाय।।
वरिष्ठ कवि राम अवतार गुप्ता ने कहा—— देने की बात मन में हो, तो दान कीजिए। लेने की बात मन में हो, तो ज्ञान लीजिए।। सब कुछ पड़ा रह जाएगा संसार में प्यारे, है त्यागना तो त्याग निजअभिमान दीजिए।। काव्य गोष्ठी के आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र द्विवेदी ने उर्दू के महान शायर डा. बशीर बद्र के सम्मान में चंद अल्फ़ाज़ कहे- एक शायर क्या गया है ,पूरी महफ़िल रो रही है। क्या मुसाफिर था, कि करके याद मंजिल रो रही है।। बागबां इंसानियत का क्या ग़ज़ब था वो ‘बशीर’, उसकी रूहे रोशनी सातों जहां में हो रही है। अंत में पुजारी विजय शुक्ला ने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया। आयोजक ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर कवियों के अतिरिक्त मुंशी राम-लखन मौर्य, पुरुषोत्तम जी, हीरा लाल मौर्य सहित अन्य की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

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